5 साल के ब्रेक और दुखों के पहाड़ के बाद रीस्टार्ट: 7 बहनों के भरोसे ने अभिषेक को बनाया डॉक्टर
कोटा से नीट की कोचिंग करने वाले अभिषेक कुमार अग्रवाल का आखिरकार डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो पाएगा। अभिषेक ने नीट यूजी-2026 में 720 में से 673 अंक हासिल कर ऑल इंडिया 422वीं रैंक हासिल की है। यहां तक पहुंचने के रास्ते में अभिषेक के जीवन में कई बाधाएं आई। 2020 नीट परीक्षा 600 अंक मिलने पर भी सरकारी मेडिकल सीट नहीं मिल पाई। वे दो राज्यों के डोमिसाइल (मूल निवास) नियमों में फंस गए। आर्थिक तंगी और निराशा के बीच वे कोटा छोड़कर वापस अपने घर असम चले गए। इस बीच इनके पिता और फिर मां का भी निधन हो गया।
अभिषेक पूरी तरह टूट चुके थे। पांच साल पढ़ाई से दूर हो गए थे,तब उनकी पांच बहनें सहारा बनी और भाई को वापस पढ़ाई के लिए मोटिवेट किया। आखिरकार उनका सपना पूरा होता दिख रहा है। पढ़िए- अभिषेक अग्रवाल के संघर्ष और सक्सेस की कहानी दोनों राज्यों के कड़े नियमों के कारण सीट नहीं मिली थी अभिषेक अग्रवाल मूल रूप से असम के रहने वाले है। उनका डॉक्टर बनने का सपना है। वे स्कूल के दिनों से होनहार स्टूडेंट्स में रहे है। सीबीएसई 10वीं में 9.8 सीजीपीए आए थे। इसके बाद अपना सपना पूरा करने 2020 में कोटा आ गए थे। यहां रहकर उन्होंने नीट की तैयारी शुरू कर दी थी। कड़ी मेहनत के दम पर 2020 में नीट परीक्षा में 600 अंक हासिल किए थे। पर कहते है ना,नियति के आगे किसी की नहीं चलती। अभिषेक की स्कूली शिक्षा राजस्थान से हुई थी और जन्म असम में हुआ था। दोनों राज्यों के कड़े डोमिसाइल (मूल निवास) नियमों के कारण उन्हें किसी भी राज्य का स्टेट कोटा नहीं मिल सका था। 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा में 600 अंक आने पर भी सरकारी मेडिकल सीट नहीं मिल पाई। आर्थिक तंगी और निराशा के बीच आखिरकार उन्हें कोटा छोड़कर वापस घर लौटना पड़ा।
माता-पिता का निधन, डॉक्टर बनने का सपना टूट चुका था असम अपने घर लौटते ही अभिषेक की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। वो मान बैठे थे कि उनके डॉक्टर बनने का सपना कभी पूरा नहीं होगा। किताबों की जगह उनके हाथ में पारिवारिक हार्डवेयर और केमिकल की दुकान का बही-खाता आ गया था। कुछ समय बाद साल 2021 में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उनके पिता का निधन हो गया। पिता को खोने के गम से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि नवंबर 2024 में दिल का दौरा पड़ने से मां का साया भी सिर से उठ गया था। माता-पिता के असमय चले जाने से परिवार की पूरी जिम्मेदारी अभिषेक के कंधों पर आ गई थी। बिजनेस संभालते हुए दिन बीत रहे थे। 7 बहनें बनीं अपने भाई की ढाल पढ़ाई की उम्मीद पूरी तरह टूटती दिख रही थी। तब अभिषेक की सात शादीशुदा बहनों नीलम, शीतल अग्रवाल, सीमा अग्रवाल, सोनिया गोयल, प्रिया बंसल, पायल पोद्दार और डिंपल अग्रवाल ने अपने भाई की ढाल बनने का फैसला किया।
बहनों ने न केवल अभिषेक का हिम्मत से सामना करने के लिए हौसला बढ़ाया, बल्कि कोटा में उनकी पढ़ाई और रहने का पूरा खर्च खुद उठाने की जिम्मेदारी ली। बहनों के इसी अटूट भरोसे और संबल के दम पर फरवरी 2025 में अभिषेक ने जिंदगी का 'रीस्टार्ट' बटन दबाया और मई 2025 में एक बार फिर कोटा की धरती पर कदम रखा। एम्स से एमबीबीएस करना चाहते 2025 में वे वापस कोटा आए और नीट की तैयारी शुरू की। अभिषेक ने दिन-रात एक कर मेहनत की और जब नीट यूजी-2026 का परिणाम आया, तो उन्होंने देश के टॉप-500 स्टूडेंट्स में अपनी जगह बनाकर सबको हैरान कर दिया। अब अभिषेक किसी प्रतिष्ठित एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं और उनका सपना भविष्य में एक सफल न्यूरोसर्जन बनकर समाज की सेवा करना है।


