डिजिटल भुगतान बना जी का जंजाल: साइबर फ्रॉड जांच में व्यापारियों को घंटों बैठाने पर करवर बाजार पूरी तरह बंद,निर्दोष व्यापारियों के साथ अपराधियों जैसा सलूक
बूंदी (करवर)
साइबर फ्रॉड से जुड़े संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन की जांच के नाम पर दो स्थानीय व्यापारियों को 10 से 12 घंटे तक थाने में बैठाए रखने के विरोध में बुधवार को करवर का पूरा बाजार पूरी तरह बंद रहा। संयुक्त व्यापार समिति के बैनर तले एकजुट हुए व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और दोषी थानाधिकारी (SHO) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
क्या है पूरा विवाद?
संयुक्त व्यापार समिति के सचिव मुकेश जिंदल ने बताया कि मामला 21 जुलाई का है। करवर थाना पुलिस ने साइबर फ्रॉड से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की जांच के सिलसिले में दो स्थानीय दुकानदारों को पूछताछ के लिए बुलाया था। आरोप है कि पुलिस ने दोनों निर्दोष व्यापारियों को लगभग 10 से 12 घंटे तक थाने में बैठाकर रखा और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया, जिससे व्यापारिक समुदाय में गहरा असंतोष फैल गया।
'डिजिटल इंडिया में ऑनलाइन पेमेंट पर कार्रवाई अनुचित'
व्यापारियों ने डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा:
"आजकल अधिकांश ग्राहक क्यूआर कोड और UPI से भुगतान करते हैं। यदि कोई अनजान ग्राहक सामान खरीदकर ऑनलाइन पेमेंट करता है और बाद में वह राशि साइबर फ्रॉड से जुड़ी निकलती है, तो इसमें दुकानदार का क्या दोष? निर्दोष व्यापारियों को घंटों थाने में बैठाने से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और कारोबार दोनों पर बेहद बुरा असर पड़ता है।"
पुलिस पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस निर्दोष दुकानदारों पर अपनी सख्ती दिखा रही है, जबकि इलाके में अवैध बजरी खनन, सट्टा और मादक पदार्थों (गांजे) का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। पुलिस इन अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करने के बजाय आम व्यापारियों को परेशान कर रही है।
बाजार ठप, उग्र आंदोलन की चेतावनी
बुधवार को श्योजी लाल गुर्जर (अध्यक्ष), मुकेश जिंदल, माणकचंद जैन, मदन नागर, दिनेश जिंदल, हेमराज नागर और आशीष मित्तल सहित बड़ी संख्या में व्यापारियों ने बाजार बंद रखकर सड़कों पर प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की गई और निष्पक्ष जांच का आश्वासन नहीं मिला, तो इस आंदोलन को जिला स्तर पर और अधिक उग्र किया जाएगा।
पुलिस का पक्ष: वहीं मामले में पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह केवल जांच प्रक्रिया का एक सामान्य और नियमित हिस्सा था तथा किसी भी व्यापारी को प्रताड़ित नहीं किया गया है।


