RPSC हिंदी शिक्षक भर्ती में फर्जी डिग्री का पर्दाफाश: SOG ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर समेत 2 को किया गिरफ्तार
जयपुर / अजमेर (राजस्थान)
जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की प्राध्यापक-हिन्दी (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हथियाने के फर्जीवाड़े में एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) को बड़ी सफलता मिली है। एसओजी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर अभ्यर्थी को भर्ती प्रक्रिया में अनुचित लाभ पहुंचाया था।
कोर्ट ने 5 दिन के रिमांड पर भेजा
एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में सुशील शर्मा (43) निवासी अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) जो मेवाड़ यूनिवर्सिटी का पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक है, और उसका साथी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया (32) निवासी जोधपुर शामिल हैं। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 25 जुलाई तक रिमांड पर लिया गया है, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि फेक डिग्री से जुड़े मामलों में ये दोनों आरोपी पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं।
RPSC सत्यापन में खुला फर्जीवाड़े का राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब RPSC द्वारा आयोजित प्राध्यापक-हिन्दी परीक्षा-2022 की पात्रता जांच के दौरान अभ्यर्थी कमला कुमारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी (गंगरार, चित्तौड़गढ़) से जारी एम.ए. (हिन्दी) की डिग्री पेश की। आयोग द्वारा जब इस डिग्री का सत्यापन करवाया गया, तो यूनिवर्सिटी ने इस डिग्री को जारी करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद मार्च 2024 में अजमेर के सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज किया गया था।
यूनिवर्सिटी के डीन की मिलीभगत से तैयार हुई फेक डिग्री
एसओजी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन कौशल किशोर चंदुल से संपर्क कर यह फर्जी डिग्री तैयार करवाई थी। इस पूरे नेटवर्क में यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक सुशील शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
एसओजी अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में फर्जी डिग्री गिरोह से जुड़े कई अन्य बड़े नामों और अन्य भर्तियों में किए गए फर्जीवाड़ों का भी पर्दाफाश हो सकता है।

