संघर्ष को मात देकर रींगस के घुमंतू गाड़िया लोहार के बेटे ने NEET में रचा इतिहास; समाज से नीट क्लियर करने वाले बने राजस्थान के पहले छात्र
रींगस (सीकर/ कमलेश जैन)। तमाम दुश्वारियों, कड़े संघर्ष और सुविधाओं के घोर अभाव को पीछे छोड़ते हुए रींगस के एक होनहार ने वो कर दिखाया है, जो आज तक राजस्थान में नहीं हुआ। पेपर लीक और फिर री-एग्जाम के दौर से गुजरने के बाद जारी हुए 'नीट यूजी-2026' (NEET UG 2026) के परीक्षा परिणामों में रींगस के घुमंतू गाड़िया लोहार परिवार के बेटे सुनील गाड़िया लोहार ने अखिल भारतीय स्तर पर 5000वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। सुनील संभवतः प्रदेश के पहले ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने गाड़िया लोहार समाज से आकर इस कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है।
- आज भी सुविधाओं से महरूम है परिवार
महाराणा प्रताप के दौर से गौरवशाली इतिहास समेटे गाड़िया लोहार समाज का यह परिवार आज भी आधुनिक सुख-सुविधाओं से दूर घुमंतू जीवन जीने को मजबूर है। सुनील के घर में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, लेकिन इन झोपड़ियों से निकले हौसले ने देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक को क्रैक कर दिया। सुनील की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे रींगस शहर और समाज में जश्न का माहौल है।
- मां की आंखों में छलके आंसू, पिता बोले- लगन हो तो मंजिल दूर नहीं
बेटे की इस स्वर्णिम सफलता पर मां सीकरी देवी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, जिन्हें वह पारंपरिक घूंघट की ओट में छिपाने का प्रयास करती दिखीं। वहीं, सुनील के पिता भगवान सहाय ने भावुक होते हुए कहा, "हम लोग भले ही घुमंतू जीवन जीते हैं, लेकिन सुनील ने दिन-रात एक करके यह साबित कर दिया कि अगर सच्ची लगन हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। आज सुनील ने पूरे समाज का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। मैं चाहता हूँ कि समाज का हर बेटा-बेटी पढ़े और आगे बढ़े।"
- बधाई देने वालों का लगा तांता
सुनील की इस कामयाबी की गूंज पूरे क्षेत्र में है। सफलता की खबर मिलते ही शहरवासी नगर पालिका उपाध्यक्ष अमित शर्मा के नेतृत्व में सुनील के निवास पर पहुंचे और माला व साफा पहनाकर होनहार का अभिनंदन किया।
- नीट रिजल्ट में राजस्थान का दबदबा
गौरतलब है कि इस वर्ष नीट यूजी-2026 में हरियाणा के पांशुल बंसल और पंजाब के आर्यन गुप्ता ने 715 अंकों के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया है। इस परीक्षा में राजस्थान का भी दबदबा रहा है, जहां टॉप 100 की सूची में अकेले कोटा में रहकर तैयारी करने वाले 44 छात्रों ने जगह बनाई है, जबकि टॉप 10 में कोटा कोचिंग के 4 छात्र शामिल हैं। इसी कड़े मुकाबले के बीच सुनील की यह सफलता देश भर में मिसाल बन गई है।


