मॉनिटरिंग के अभाव में शहर की सफाई के हालात खराब, ऑटो टीपर भी नियमित नहीं आते
सफाई पर हल साल 5 करोड़ खर्च; नालों की स्थिति ऐसी जैसे बरसों से साफ नहीं हुए, नप अफसर बेपरवाह
खैरथल (हीरालाल भूरानी) जिला मुख्यालय की सफाई पर हर साल पांच करोड़ रुपए खर्च होते हैं। फिर भी सफाई व्यवस्था की स्थिति खराब है। खासकर, बड़े नालों व नालियों की। इनकी सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। अधिकतर नाले गंदगी से अटे हैं। इनसे बदबू व मच्छर पन रहे हैं। कई नालों को देखने पर तो लगता है कि ये वर्षों से साफ नहीं हुए। जानकारी के अनुसार शहर की सफाई व्यवस्था को 4 जोन में बांटा गया - है। इनमें तीन जोन का ठेका हर साल एक-एक करोड़ रुपए का छूटता है। वहीं एक जोन में नगरपरिषद के 29 सफाई कर्मियों की ड्यूटी है, जिनका सालाना वेतन करीब 2 करोड़ 86 लाख के करीब है। इसके बाद भी सफाई व्यवस्था बेपटरी है। इसकी प्रमुख वजह नगरपरिषद की सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग नहीं की जाती। शहर में कुछ चुनींदा स्थानों को छोड़कर अन्य जगह सफाई हो रही है या नहीं इसका सफाई निरीक्षक तक को पता नहीं है। इधर, लोगों का आरोप है कि कई वार्डों में कचरा संग्रहण के लिए ऑटो टीपर तक नहीं आते। इस वजह से जगह-जगह कचरा पॉइंट बन गए हैं।
बीमारियों फैलने का खतरा, लोगों में आक्रोश :- नाले-नालियों में जमा गंदगी और जमा पानी से मच्छरों पन रहे हैं। कई कॉलोनियों में नाली का पानी सड़क पर आ रहा है। इससे आवागमन में परेशानी होती है। साथ ही मच्छरों से बीमारियां पनपने का खतरा रहता है। नगर परिषद प्रतिपक्ष नेता विक्रम चौधरी का कहना है कि सफाई की बदहाली से शहर की जनता परेशान है। अधिकारी सफाई पर ध्यान नहीं दे रहे।कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
शहर में 35 वार्ड, संसाधनों की कमी नहीं: - शहर में 35 वार्ड हैं। इनकी सफाई के लिए नगर परिषद के संसाधन व बजट भी पर्याप्त है। कचरा परिवहन के लिए पांच ट्रैक्टर, 14 ऑटो टिपर, तीन कचरा भरने के लोडर सहित एक मृत पशुओं को उठाने के लिए क्रेन है। इतने संसाधन होने के बाद भी शहर में जगह-जगह गंदगी रहती है। कई नालों बिल्कुल जाम हैं। सफाई निरीक्षक हवासिंह से सवाल किया तो उन्होंने ऑफिस में न होने की बात कहकर सफाई व्यवस्था की जानकारी देने से मना कर दिया।


