शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नीट परीक्षा में पारदर्शिता की मांग को लेकर शेखावाटी से दिल्ली तक गूंजी आवाज
उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव)। राजस्थान के शेखावाटी अंचल से नीट छात्र स्वर्गीय प्रदीप मेघवाल (माहिच) के मामले में शुरू हुई न्याय की लड़ाई अब राष्ट्रीय स्तर के जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय तक संघर्ष करने के बाद गांव लौटे सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश मीणा किशोरपुरा एवं रविंद्र सिंह पोंख ने एक बार फिर सांकेतिक धरना शुरू कर दिया है।
धरने के दौरान सुरेश मीणा ने बताया कि जंतर-मंतर पर चले ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान उठाई गई कई प्रमुख मांगों पर केंद्र सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है, जबकि शेष मांगों पर भी जल्द अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।
गुढ़ा गौड़जी से दिल्ली तक का सफर
सुरेश मीणा ने आंदोलन की यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह संघर्ष गुढ़ा गौड़जी क्षेत्र से शुरू होकर गांव-गांव, विधानसभा क्षेत्र, सीकर, जयपुर और अंततः देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचा। आज यह पूरे देश में शिक्षा सुधार की सबसे सशक्त आवाज बन चुका है। उन्होंने कहा, "जब यह संघर्ष शुरू किया था, तब सीमित लोग साथ थे और कई लोगों ने मजाक भी उड़ाया, लेकिन आज पूरे देश का समर्थन इस मुहिम के साथ है।"
प्रमुख मांगों पर सरकार का सकारात्मक रुख
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर पूर्ण रोक, कठोर कानून और पीड़ित छात्रों को त्वरित न्याय दिलाना है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की है तथा आत्मदाह करने वाले नीट छात्र के परिजनों को आर्थिक सहायता व मुआवजे के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है।
ऐतिहासिक बदलाव का बनेगा आधार
सुरेश मीणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर उठाई गई सकारात्मक पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच और कड़े कानून प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो यह देश के लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करेगा। उन्होंने संघर्ष में सहयोग देने वाले सभी सामाजिक संगठनों और आमजन का आभार जताया।

