डमी कैंडिडेट से दिलवाया पेपर और बन गया राजस्थान में कांस्टेबल, 15 साल बाद FIR दर्ज
राजस्थान के टोंक जिले में साल 2010-11 की आरएसी कांस्टेबल भर्ती से जुड़ा एक सनसनीखेज फर्जीवाड़ा सामने आया है।आरोप है कि एक अभ्यर्थी ने लिखित परीक्षा में अपनी जगह डमी कैंडिडेट को बैठाकर नौकरी हासिल कर ली। मामले में एसओजी और विभागीय जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद अब टोंक कोतवाली थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आरोपी की पहचान नौवीं बटालियन आरएसी में तैनात कांस्टेबल श्रीराम मीणा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, एसओजी की शुरुआती जांच और विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर नौवीं बटालियन आरएसी के कमांडेंट राजेश चौधरी ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी समेत राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों पर रोक) अधिनियम, 1992 की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।
कब हुआ था चयन?
पुलिस अधीक्षक रोशन कुमार मीणा ने बताया कि आरोपी ने जनवरी 2011 में कोतवाली क्षेत्र स्थित परीक्षा केंद्र पर अपनी जगह डमी अभ्यर्थी से लिखित परीक्षा दिलाई थी। इसके बाद 2 जुलाई 2011 को चयनित होने पर उसने आवश्यक दस्तावेज और घोषणा-पत्र जमा किए और 18 जुलाई 2014 से आरएसी कांस्टेबल के रूप में सेवा शुरू कर दी। इस दौरान वह वेतन और अन्य सरकारी सुविधाओं का भी लाभ उठाता रहा।
2 साल से है गैरहाजिर
पुलिस के अनुसार, आरोपी साल 2024 से नौकरी पर गैरहाजिर चल रहा है। वहीं दावा है कि वह इन दिनों साधु का वेश धारण कर रह रहा है और कांटोली गांव में उसका एक आश्रम भी संचालित है। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पुलिस कर रही ये जांच
पुलिस भर्ती से जुड़े दस्तावेज, परीक्षा रिकॉर्ड और विभागीय अभिलेखों की गहन जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह फर्जीवाड़ा केवल एक व्यक्ति तक सीमित था या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह भी सक्रिय था।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि फिलहाल जांच का केंद्र डमी अभ्यर्थी के जरिए परीक्षा दिलाने के आरोप हैं। जांच में जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- रिपोर्ट -कमलेश जैन


