विधिक जागरूकता शिविर, बाल विवाह सामाजिक व कानूनी अपराध, बारात में शामिल होने वाले भी होंगे सजा के भागीदार
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डीडवाना एवं तालुका विधिक सेवा समिति एडीजे कोर्ट मकराना की अध्यक्ष आशा चौधरी के निर्देशानुसार मंगलवार को एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
यह शिविर राजौरा बांस स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में आयोजित हुआ, जिसमें तालुका विधिक सेवा समिति के पैनल अधिवक्ता तलत हुसैन हनीफी ने छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों को कानून की महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। शिविर को संबोधित करते हुए पैनल अधिवक्ता तलत हुसैन हनीफी ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक और कानूनी अपराध है। कानूनन विवाह के लिए लड़की की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष होनी अनिवार्य है। इससे कम उम्र में किया गया कोई भी विवाह कानून की नजर में अमान्य घोषित किया गया है।
उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह करवाने या उसमें सहयोग करने वाले दूल्हा-दुल्हन, माता-पिता, रिश्तेदार, विवाह संपन्न कराने वाले पंडित या मौलवी, टेंट व कैटरिंग वाले और यहां तक कि बारात में शामिल होने वाले लोग भी कानूनन अपराधी माने जाते हैं। इस अपराध के लिए 2 साल की कड़ी जेल, 1 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। एडवोकेट हनीफी ने छोटे-मोटे आपसी विवादों को कोर्ट-कचहरी तक ले जाने के बजाय आपसी समझबूझ से सुलझाने पर जोर दिया।
उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के तहत शुरू की गई सामुदायिक मध्यस्थता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य मुकदमों में होने वाले भारी-भरकम खर्च और समय की बर्बादी को रोकना है, ताकि आपसी बातचीत से मामलों का निपटारा कर गांवों को मुकदमा मुक्त गांव बनाया जा सके। इस विधिक जागरूकता शिविर के अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य रामचंद्र राजकुमार, शिक्षिका निर्मला चौधरी, योगिता कमल, रुकसाना बानो, शिक्षक मोहम्मद आदिल, लक्ष्मणराम सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।


