राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ का बड़ा फैसला: चपरासी भर्ती में जीरो नंबर वाले अभ्यर्थियों को मिली अंतरिम राहत, सिंगल बेंच के आदेश पर रोक
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 से जुड़े एक अहम मामले में जीरो नंबर या उससे कम अंक लाने वाले चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। खंडपीठ ने सिंगल बेंच के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत जीरो कट ऑफ वाली कैटेगरी की मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया गया था।
सरकार और चयन बोर्ड की दलील
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) और सरकार की ओर से खंडपीठ में अपील दायर की गई थी। इसमें तर्क दिया गया कि:
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भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद सिंगल बेंच के 22 मई के आदेश से एक नई शर्त लागू कर दी गई है।
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न तो भर्ती के सेवा नियमों में और न ही विज्ञापन की किसी शर्त में न्यूनतम अंक (Cut-off) का कोई प्रावधान तय था।
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इस आदेश से वे कई चयनित अभ्यर्थी भी प्रभावित हो रहे थे जो इस कानूनी मामले में पक्षकार (Party) भी नहीं थे।
इन तर्कों से सहमत होते हुए खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं और 6 सप्ताह में जवाब मांगा है।
क्या था सिंगल बेंच का मामला और तर्क?
इससे पहले सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि सरकारी सेवा (चाहे पद चतुर्थ श्रेणी का ही क्यों न हो) में एक 'बेसिक स्टैंडर्ड' का होना अनिवार्य है। बिना न्यूनतम अंक निर्धारित किए भर्ती करना गैर-संवैधानिक माना जाएगा। कोर्ट ने बोर्ड को न्यूनतम अंक तय करने की छूट भी दी थी।
याचिकाकर्ता का पक्ष: मामले में याचिकाकर्ता ने एक्स सर्विसमैन (ओबीसी) कैटेगरी के तहत आवेदन किया था और परीक्षा में उसके नंबर माइनस में आए थे। याचिकाकर्ता का पक्ष था कि कई कैटेगरी में कट ऑफ 0.0033 (जीरो) गई है और उन श्रेणियों में अभ्यर्थियों का चयन भी हुआ है। चूंकि कई पद खाली हैं और नियमों में न्यूनतम अंकों की बाध्यता नहीं है, इसलिए जीरो और माइनस अंक लाने वाले अभ्यर्थियों की योग्यता में कोई अंतर न मानते हुए नियुक्ति दी जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि यह मौजूदा सरकार की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक है, जिसमें 21 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे। हाईकोर्ट के इस ताज़ा अंतरिम आदेश से फिलहाल चयनित और प्रभावित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

