बिरसा मुंडा जनजाति गौरव के प्रतीक - मंगलचन्द सैनी
झुंझुनू (सुमेरसिंह राव) बिरसा मुंडा ने अपने मात्र 25 वर्ष के जीवन में ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध ऐसा आंदोलन किया कि आज उन्हें आदिवासी अपना भगवान मानते हैं ।उनकी जयन्ती 15 नवम्बर को आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाते हैं ।उन्होंने आदिवासियों की भूमि को बचाने जल जंगल व जमीन के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों को बचाने व जमींदारी प्रथा के विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया था ।
अपने मुण्डा समुदाय की गरीबी अभावों व अंधविश्वासों को दूर करने का अभियान चलाया था ।ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों का धर्मांतरण करवाये जाने का भी उन्होंने विरोध किया ।षड्यंत्र के तहत उन्हें गिरफ़्तार कर जेल में डाल दिया गया जहाँ धीमा जहर दिया जाने के फलस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई ।बिहार उड़ीसा झारखंड पश्चिमी बंगाल में आदिवासी उन्हें भगवान के रूप में पूजते हैं ।जब जब आदिवासी विद्रोह के बारे में चर्चा होगी बिरसा मुंडा सबसे पहले याद किये जाएँगे ।
- लेखन- मंगलचन्द सैनी पूर्व तहसीलदार


