तखतगढ़ में कोबरा ने सर्प मित्र को डसा हालत गंभीर; कोबरा को प्लास्टिक बोतल बंद कर ले गया अस्पताल , 400 से अधिक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर चुके है संजय वाल्मीकि
तखतगढ़ (पाली/बरकत खान) कस्बे में वन्यजीवों और सांपों को जीवनदान देने वाले एक जांबाज सर्प मित्र खुद काल का ग्रास बनते-बनते बचे। सांप पकड़ने के दौरान जरा सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका एक जीवंत मामला तखतगढ़ के बाजरा पोल गौशाला के पीछे सामने आया है। यहाँ एक मकान में घुसे खतरनाक कोबरा सांप का रेस्क्यू करते समय सर्प मित्र संजय वाल्मीकि को सांप ने उंगली पर डस लिया। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
मिली जानकारी के अनुसार, बाजरा पोल गौशाला के पीछे स्थित एक रिहायशी मकान में कोबरा सांप घुसने की सूचना पर सर्प मित्र संजय वाल्मीकि मौके पर पहुंचे थे। वे हमेशा की तरह सावधानी से कोबरा को काबू में करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान जरा सी चूक और लापरवाही के कारण अत्यधिक विषैले कोबरा ने अचानक हमला कर उनकी उंगली को डस लिया।
- अस्पताल में नहीं मिला समय पर इलाज, सुमेरपुर रैफर
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों और परिजनों में हड़कंप मच गया। अचेतावस्था में सर्प मित्र संजय को आनन-फानन में स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तखतगढ़ ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि वहाँ प्राथमिक उपचार या एंटी-वेनम (सांप के जहर की दवा) की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण समय पर इलाज नहीं मिल सका। इसके बाद हालत बिगड़ती देख 108 एम्बुलेंस की सहायता से उन्हें तुरंत सुमेरपुर अस्पताल रैफर किया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है।
400 से अधिक सांपों को दे चुके हैं जीवनदान
- निवर्तमान पार्षद सूरज वाल्मीकि ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि संजय वाल्मीकि क्षेत्र के जाने-माने सर्प मित्र हैं। वे अब तक अपनी जान जोखिम में डालकर करीब 400 से अधिक जहरीले और गैर-जहरीले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें जंगलों में छोड़ चुके हैं। उनकी इस बहादुरी के कारण क्षेत्र के लोग उन्हें अक्सर याद करते हैं। फिलहाल संजय की सलामती के लिए स्थानीय लोग दुआएं कर रहे हैं।


