ज्येष्ठ अधिक मलमास की विदाई, गूजेगी की शहनाइयां
अलवर(राजस्थान/कमलेश जैन) आज 15 जून को मलमास समाप्त हो गया है। अब 11 साल बाद फिर ज्येष्ठ मास में मलमास पड़ेगा। आज 15 जून को मलमास समाप्त होने के बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास प्रारंभ होगा। जबकि अगला अधिकमास वर्ष 2029 में चैत्र मास में आएगा। अधिकमास के दौरान श्रद्धालुओं ने विष्णु मंदिरों में दर्शन-पूजन, जप-तप, गंगा स्नान, दान-पुण्य और पंचक्रोशी यात्रा की हैं। यह सिलसिला आज 15 जून तक चला।
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि मलमास के कारण ज्येष्ठ मास दो माह का हो गया है। ऐसे में आज 15 जून के बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास के 15 दिन शेष रहेंगे। इसकी पूर्णाहुति 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ होगी।
अधिकमास आठ वर्ष बाद ज्येष्ठ मास में पड़ा है। इससे पहले पिछला अधिकमास सावन मास में पड़ा था।
हिंदू पर्व-त्योहार चंद्रमा की स्थिति और उसकी गति पर आधारित होते हैं। दो मई से ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की शुरुआत हुई थी। इसके बाद 17 मई से अधिकमास का शुक्ल पक्ष प्रारंभ हुआ, जो 15 जून तक रहा। इसके बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो 29 जून की ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगा।
मान्यता है कि इसी मास में भगवान श्रीराम और हनुमानजी का मिलन हुआ था। इस बार ज्येष्ठ मास दो माह का होने के कारण आठ बड़े मंगल पड़े हैं। इसके चलते हनुमान मंदिरों में पूजा-अर्चना और भंडारे का सिलसिला लगातार जारी रहा।
मांगलिक कार्य हो जाएंगे शुरू
अधिकमास समाप्त होने के साथ ही 16 जून से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। मलमास समाप्त होने के बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास में गृह प्रवेश, मुंडन आदि मांगलिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे। जबकि विवाह आदि के लिए शुभ लग्न मुहूर्त 18 जून के बाद से बन रहे हैं।


