लूपिन फाउंडेशन और राजस्थान सरकार की अनूठी पहल: गोविंदगढ़ सीएचसी में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित; 66 मरीजों को मिला लाभ
गोविंदगढ़, (अलवर:) लूपिन ह्यूमन वेलफेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन, अलवर और राजस्थान सरकार के साझा प्रयासों से अलवर जिले में गैर-संचारी बीमारियों (Non-Communicable Diseases - NCD) की रोकथाम और स्वास्थ्य सुधार के लिए एक विशेष साझा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज लूपिन फाउंडेशन के सानिध्य में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), गोविंदगढ़ में एक विशाल एवं अत्याधुनिक स्वास्थ्य शिविर का सफल आयोजन किया गया।
- अत्याधुनिक मोबाइल मेडिकल वैन से हुईं निःशुल्क जाँचें:
शिविर के अंतर्गत लूपिन फाउंडेशन की अत्याधुनिक मोबाइल मेडिकल वैन के माध्यम से प्रशिक्षित मेडिकल टीम द्वारा मरीजों को सेवाएं दी गईं। शिविर में कुल 66 मरीजों के स्वास्थ्य की गहन जाँच की गई। इस दौरान ब्लड प्रेशर (BP), शुगर, स्पायरोमेट्री (फेफड़ों की जाँच), सीबीसी (CBC), एक्स-रे (X-Ray), ईसीजी (ECG), एलएफटी (LFT) और थायराइड जैसी महत्वपूर्ण जाँचें पूरी तरह निःशुल्क की गईं और आवश्यक दवाइयाँ वितरित की गईं। शिविर में आए अधिकांश मरीज सांस की बीमारी, मधुमेह (शुगर) और हृदय रोग से पीड़ित पाए गए।
- अनुभवी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने दी सेवाएं:
स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. दिनेश कुमार सहित शिविर संचालक गौरव सैनी और रिंकू चौधरी ने व्यवस्थाएं संभालीं। इसके साथ ही एएनएम मोनिका व विनोद कुमारी, ईसीजी तकनीशियन रविता चौधरी, फार्मासिस्ट महेश शर्मा, रेडियोग्राफर पुष्पेंद्र गहलोत, लैब तकनीशियन (LT) सपना शर्मा और नितेश सैनी ने मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दीं। शिविर के सफल संचालन में स्थानीय सीएचसी इंचार्ज डॉ. शिवकांत शर्मा, डॉ. निशी अग्रवाल, डॉ. डी.पी. शर्मा और डॉ. नसीब खान सहित पूरे अस्पताल स्टाफ का सराहनीय सहयोग रहा।
- स्थानीय नागरिकों ने की सराहना, भविष्य में स्थाई करने की मांग:
सीएचसी प्रभारी डॉ. शिवकांत शर्मा के साथ-साथ क्षेत्र के लाभार्थियों—सुषमा जैन, नारायण लाल सैनी, चौथाराम सैनी, सतीश, जगदीश प्रसाद, मुमताज बेगम सहित दर्जनों ग्रामीणों ने इस मानवीय और स्वास्थ्य रक्षक पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। ग्रामीणों ने लूपिन फाउंडेशन और सरकार के इस प्रयास को बेहद मददगार बताते हुए मांग की है कि भविष्य में भी ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएं और इस व्यवस्था को स्थाई रूप दिया जाए ताकि गरीब व जरूरतमंद मरीजों को घर के पास ही बेहतर इलाज मिल सके।


