सेवा और श्रद्धा की अनूठी मिसाल; कलयुग की 'श्रवण कुमार' बनीं बहू: 97 वर्षीय सास को सिर पर उठाकर कर रही हैं ब्रज 84 कोस परिक्रमा
डीग (राजस्थान) अध्यात्म और आस्था के केंद्र ब्रज मंडल में चल रही 'ब्रज 84 कोस परिक्रमा' में इन दिनों श्रद्धा और पारिवारिक संस्कारों का एक ऐसा अनूठा दृश्य देखने को मिल रहा है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। हरियाणा की सुप्रसिद्ध लोक गायिका काजल चौधरी अपनी 97 वर्षीय बुजुर्ग सास, श्रीमती चन्द्री देवी को एक प्लास्टिक के टब में बैठाकर और उसे अपने सिर पर उठाए इस कठिन परिक्रमा को पूरा कर रही हैं।
काजल चौधरी की यह यात्रा जैसे ही डीग जिले की सीमा में प्रविष्ट हुई, उनके इस अद्भुत सेवा भाव और अदम्य साहस को देखने के लिए परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जगह-जगह पर फूल-मालाओं और आरती के साथ इस 'आधुनिक श्रवण कुमार' रूपी बहू और उनकी सास का भव्य स्वागत-सम्मान किया जा रहा है।
- सास-ससुर की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म: काजल चौधरी
इस यात्रा के दौरान अपनी सास की सेवा में लीन काजल चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा— "मुझे अपनी सास की सेवा करते हुए इस पावन ब्रज भूमि की परिक्रमा करने का जो सौभाग्य मिला है, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। माता-पिता और सास-ससुर की सेवा से बड़ा संसार में कोई दूसरा धर्म या तीर्थ नहीं है।"
उन्होंने समाज की सभी महिलाओं और युवा पीढ़ी से अपील की कि वे अपने घर के बुजुर्गों को बोझ न समझें, बल्कि उन्हें भगवान का रूप मानकर उनकी सेवा और सम्मान करें।
- स्वास्थ्य और सुरक्षा का रखा जा रहा है ध्यान
काजल चौधरी के इस संकल्प को देखते हुए परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालु उन्हें विश्राम देने के लिए आगे आ रहे हैं। बुजुर्ग चन्द्री देवी की आयु को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन और स्थानीय डॉक्टरों की टीम द्वारा उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच भी की जा रही है, ताकि यात्रा के दौरान उन्हें कोई शारीरिक कष्ट न हो।
यह यात्रा वर्तमान समाज में टूटते पारिवारिक मूल्यों के बीच बुजुर्गों के प्रति सम्मान, समर्पण और सनातन संस्कारों का एक जीवंत और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरी है।


