शीतला अष्टमी का त्योहार पूर्ण श्रद्धा भाव से मनाया

लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन ) शीतला अष्टमी का व्रत 22 मार्च , शनिवार को आज उपखंड क्षेत्र में रखा गया। शीतला अष्टमी को बसौड़ा भी कहा जाता है। शीतला अष्टमी का दिन मां शीतला की पूजा के लिए समर्पित रहा, लोग रात्रि से ही माता के पूजन में व्यस्त रहे। यह सिलसिला देर सवेर तक माता के मंदिरों में चला ।शीतला माता सेहत और सफाई की देवी मानी गई हैं। शीतला माता को चेचक, त्वचा रोग को ठीक करने वाली देवी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि माता शीतला, देवी पार्वती का ही रूप हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता की पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में खुशहाली आती है। वहीं, आज के दिन कुछ लोगों ने व्रत रखा। और मां को ठंडा व बासी भोग कस्बे स्थित छोटी माता एवं रोणीजा वाले रोड बांध स्थित बड़ी माता के लगाया। बड़ी माता परिसर में रात्रि मे जागरण भी आयोजित किया गया।
आज के दिन घर में चूल्हा जलाना वर्जित माना गया है। इसलिए शीतला अष्टमी से एक दिन पहले ही घर घर में भोग तैयार किया गया। तथा आज प्रातःअष्टमी के दिन देवी को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बासी व्यंजनो को ग्रहण किया ।ऐसा कहा जाता है कि इस दिन चूल्हा नहीं जलाते और केवल बासी खाना ही खाते हैं। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि गर्म खाना या चूल्हे की गर्मी से शरीर में उष्णता बढ़ सकती है, जिससे त्वचा रोग हो सकते हैं। इस वजह से इस दिन ठंडा व बासी खाना खाने की परंपरा है। यह भी कहा जाता है कि माता शीतला को बासी भोजन अति प्रिय हैं। माता को पुआ पूडी रावड़ी चावल आदि व्यंजनों का भोग लगाकर श्रद्धालुओं ने सुख समृद्धि आरोग्य की कामना की।






