संकरी गलियां बनीं काल, एक ही परिवार के 6 चिराग बुझे; तमाशबीन बना रहा सिस्टम

Feb 26, 2026 - 14:01
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संकरी गलियां बनीं काल, एक ही परिवार के 6 चिराग बुझे; तमाशबीन बना रहा सिस्टम

मेरठ (शशि जायसवाल) के मेरठ के किदवई नगर इलाके में एक कपड़ा कारोबारी के घर में भीषण आग लग गई। इस हादसे में परिवार के 6 लोग जिंदा जलकर मर गए। इनमें 5 बच्चे शामिल थे, जिनमें जुड़वां बेटियां भी थीं। यह घटना सोमवार की शाम हुई, जिसने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी। घटना सोमवार की देर शाम कपड़ा कारोबारी इकबाल उर्फ आसिम अपने भाई फारुख के साथ नमाज पढ़ने मस्जिद गए थे। घर में उस समय इकबाल की पत्नी रुखसार (30 साल), उनकी मां अमीर बानो (55 साल) और 5 बच्चे थे। बच्चे खेल रहे थे और महिलाएं रसोई में खाना बना रही थीं। अचानक घर में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि सभी लोग लपटों में फंस गए। घर दो मंजिला था और उसमें कपड़ों का बड़ा स्टॉक रखा हुआ था। कपड़े होने से आग और तेजी से भड़क गई।

  • बचाव कार्य और मुश्किलें

पड़ोसियों ने धुआं और लपटें देखकर शोर मचाया और पुलिस व फायर ब्रिगेड को सूचना दी। इलाका संकरी गलियों वाला है, इसलिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां अंदर नहीं जा सकीं। फायर फाइटर्स को पड़ोसी घरों की छतों से होकर मकान तक पहुंचना पड़ा। उन्होंने सामने वाले मकान से सीढ़ियां लगाकर अंदर जाकर लोगों को निकालने की कोशिश की।

करीब 30 मिनट तक परिवार लपटों में फंसा रहा। आग बुझाने में फायर ब्रिगेड को लगभग 2 घंटे लगे। बचाव के दौरान इकबाल की मां अमीर बानो और एक पड़ोसी गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।​​
बचाव कार्य में बाधक बनीं 3 बड़ी लापरवाहियां
​स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि सिस्टम और व्यवस्था चुस्त होती, तो शायद बच्चों की जान बच सकती थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी के पीछे ये प्रमुख कारण रहे: ​दमकल की गाड़ियों का न पहुंच पाना: संकरी गलियों के कारण फायर टेंडर मौके से काफी दूर खड़े रहे। पाइप बिछाने और पानी पहुंचाने में जो कीमती वक्त बर्बाद हुआ, वही बच्चों की मौत का कारण बना।
​बिजली विभाग की ढिलाई: आग लगने के काफी देर बाद तक इलाके की बिजली नहीं काटी गई, जिससे करंट फैलने के डर से स्थानीय लोग चाहकर भी पानी नहीं डाल पा रहे थे।
​बचाव उपकरणों का अभाव: घनी आबादी वाले इस इलाके में न तो फायर हाइड्रेंट थे और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई 'एग्जिट रूट'। मकानों का एक-दूसरे से सटा होना रेस्क्यू टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना।​मौत का मंजर: दो हिस्सों में हुआ अंतिम संस्कार
​हादसे के बाद इलाके में मातम पसरा हुआ है। शवों के पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार दो चरणों में किया गया:
​23 फरवरी की रात: दो बच्चों के शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
​24 फरवरी की सुबह: महिला और बाकी तीन बच्चों के शवों को नम आंखों से विदाई दी गई।

  • भीषण हादसे में इनकी मौत

अस्पताल पहुंचाने पर रुखसार और 5 बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया।

हविश (12 साल) – फारुख की बेटी, हम्माद (4 साल) – फारुख का बेटा, अद्दस (3 साल), नाबिया (6 माह) और इनायत (6 माह) – इकबाल-रुखसार की जुड़वां बेटियां

  • पुलिस जांच और कारण

पुलिस की शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई गई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस लीक होने से आग लगी होगी। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि संकरी गलियों के कारण फायर ब्रिगेड को परेशानी हुई, लेकिन टीम ने छतों के रास्ते जाकर सभी को निकालने की कोशिश की।

  • इलाके में शोक और अफसोस

इस हादसे से पूरा किदवई नगर इलाका सदमे में है। अस्पताल में मोहल्ले के लोग और रिश्तेदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सिवाल खास के विधायक गुलाम मोहम्मद, डीएम वीके सिंह, एसएसपी अविनाश पांडे, डीआईजी कलानिधि नैथानी, एसपी क्राइम अवनीश कुमार और कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा भी अस्पताल पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। इकबाल कपड़ों का कारोबार करते हैं। वे ऑर्डर पर कपड़े तैयार कराते हैं और दूसरे शहरों की प्रदर्शनियों में बेचते हैं। घर में कपड़ों की बड़ी मात्रा होने से आग और खतरनाक हो गई।

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