आसाम के दल ने खाटू श्याम को किये निशान अर्पित
सीकर(सुमेर सिंह राव ) फागुन के महीने में जोरहाट से खाटू की यात्रा पर आने वाले भक्तों में इस बार भी वही उत्साह नजर आया। जोरहाट के श्याम परिवार से हर साल सैकड़ों की संख्या में भक्त बाबा को निशान अर्पित करते हैं। अलग-अलग टोलियों में समय और सुविधा के अनुसार रवाना होने वाले इन भक्तों की मंजिल एक ही होती है और वह है खाटू श्याम का दरबार। इस बार भी निशान यात्रियों का एक बड़ा जत्था रींगस से निशान उठा कर खाटू के लिए आया। जोरहाट के राम मंदिर में खाटू नरेश के दर्शन करने के बाद रौरया एयरपोर्ट से बाबा श्याम का जयकारा लगाते हुए रवाना हुआ यह दल सबसे पहले रींगस स्थित प्राचीन श्याम मंदिर पहुंचा और दर्शन किए। रींगस भैरू के दर्शन करने के बाद निशान भवन के रूप में विख्यात परशरामपुरिया धर्मशाला में ज्योत और पूजन के पश्चात यात्रा शुरू हुई। रींगस से खाटु की दूरी यूं तो 17 किलोमीटर है, लेकिन लक्खी मेले में अस्थायी तौर पर बनाए गए घुमावदार (जिगजैग) मार्गो के चलते 35 किलोमीटर की यात्रा के बाद निशान अर्पण का सौभाग्य मिलता है। दल के संचालक जीतू सोनी ने बताया कि एक दिन की यात्रा पूरी कर निशान अर्पित किए। वहीं फागुन एकादशी को विशेष दर्शन का लाभ लेंगे। पिछले दो दशक से जारी इस यात्रा के बारे में जीतू सोनी ने इसे साल भर का सबसे अनमोल समय बताते हैं। वहीं यात्रा में हर साल हाथों में मेहंदी रचाए और बाबा का लीला घोड़ा अपने कंधे पर उठाए श्याम सुंदर अग्रवाल ने बताया कि खाटू की इस यात्रा का समय जैसे जैसे नजदीक आता है, बाकी सभी चीजों से मोहभंग हो जाता है। जोरहाट श्याम मंडल के बैनर तले आयोजित होने वाली इस निशान यात्रा में निकटवर्ती अंचल के भक्तों के साथ ही सुदूर कोलकाता तक से प्रतिनिधित्व देखा जाता है।
जोरहाट से खाटू पहुंच रहे श्याम परिवार के दल रंग-बिरंगे कुर्ते और एक जैसे परिधान में पूरे उत्साह में नजर आते हैं। ऐसे ही एक दल में शामिल मुकेश सिंघी ने कहा कि फागुन मेले का माहौल जिसने एक बार देख लिया, फिर उसे जीवन भर नहीं भूलता। वहीं श्याम परिवार के ही एक अन्य जत्थे में शामिल संदीप मोदी ने बताया कि निशान यात्रा से इतर देवभूमि राजस्थान स्थित सालासर धाम, शाकंभरी माता, जीण माता, देलसर श्याम धाम, झुंझनू राणी सती दादी आदि विभिन्न मन्दिरों के दर्शन लाभ का अवसर इस दौरान मिलता है। इसके साथ ही सूरजगढ़ से खाटू जाने वाली निशान यात्रा में सहभागिता का दुर्लभ अवसर भी मिलता है। यात्रा को लेकर कामाख्या चांडक ने अनुभव बयां करते हुए कहा कि यह वह समय है जब आप अपने इष्ट को साक्षात नमन कर सकते हैं। यात्रा में
महिलाओं की संख्या बड़ी तादाद में रहती है, वहीं युवा वर्ग को श्याम भक्ति के बहाने अपनी जड़ों की तरफ लौटने का मौका मिलता है।
दूसरी बार फागुन में खाटूधाम आई रंजीता बेड़िया ने बताया कि सभी महिलाएं बाबा को निशान अर्पण करने को लेकर उत्साहित है। यह भक्ति की शक्ति है है कि थकान का असर किसी पर भी नजर नहीं आता। निशान यात्रा के सफल आयोजन में एकजुटता और अनुशासन के साथ ही आस्था का ज्वार उमड़ पड़ता है। कमल जालान ने जोरहाट से खाटूधाम पहुंच कर निशान अर्पित कर रहे सभी भक्तों को भाग्यशाली बताते हुए भक्ति की इस लौ को जगाए रखने की बात कही।