ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के संबंध में आदेश जारी
कोटपूतली-बहरोड़ (भारत कुमार शर्मा) 17 फरवरी। जिले में विभिन्न अवसरों यथा धार्मिक कार्यक्रमों, सामाजिक आयोजनों, विवाह समारोहों, जुलूसों, मे डीजे/लाउडस्पीकरों के अनियंत्रित उपयोग, पटाखों एवं अन्य ध्वनि स्रोतों के कारण ध्वनि प्रदूषण हो रहा हैं, जिससे आमजन के स्वास्थ्य, शांति एवं कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ध्वनि प्रदूषण (नियंत्रण एवं विनियमन) नियम, 2000 तथा माननीय न्यायालयों द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी ने आदेश जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से जारी करने के निर्देश दिए।
1. रात्रिकालीन प्रतिबंधः रात्रि 10.00 बजे से प्रातः 6.00 बजे तक किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर, डीजे, साउंड सिस्टम अथवा ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा, सिवाय विधि द्वारा अनुमत विशेष परिस्थितियों के।
2. अनुमति अनिवार्यः किसी भी सार्वजनिक / निजी कार्यक्रम में लाउडस्पीकर, डीजे या ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग संबंधित उपखंड अधिकारी / अनुमत प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा।
3. ध्वनि सीमा का पालनः सभी आयोजनों में निर्धारित ध्वनि सीमा (डेसीबल लिमिट) का पालन अनिवार्य होगा। आवासीय क्षेत्र, विद्यालय, अस्पताल, न्यायालय एवं साइलेंस जोन में किसी भी प्रकार का शोर नियमों के विरुद्ध पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
4. डीजे एवं साउंड सिस्टम पर नियंत्रणः डीजे एवं उच्च ध्वनि उत्पन्न करने वाले साउंड सिस्टम का उपयोग केवल निर्धारित समय एवं शर्तों के अंतर्गत ही किया जाएगा। प्रतिबंधित समय में डीजे बजाना पूर्णतः वर्जित रहेगा।
5. पटाखों पर नियंत्रणः- प्रतिबंधित / अवैध पटाखों का विक्रय एवं उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
6. प्रवर्तन एवं निगरानीः- समस्त उपखंड अधिकारी, पुलिस अधिकारी, नगर निकाय एवं संबंधित विभाग आपसी समन्वय से नियमित निगरानी करेंगे तथा उल्लंघन की स्थिति में तत्काल ध्वनि उपकरण जब्त कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
7. दंडात्मक कार्रवाई: उक्त आदेशों की अवहेलना करने पर संबंधित व्यक्ति/आयोजक / संचालक के विरुद्ध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 एवं अन्य प्रचलित विधियों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
8. जन-जागरूकताः- आमजन से अपेक्षा की जाती है कि वे स्वेच्छा से ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन करें तथा प्रशासन का सहयोग करें।