100 करोड़ का बजट और 2 लाख का काम, नेता प्रतिपक्ष जूली ने उजागर की सरकार की 'कछुआ चाल
राजस्थान विधानसभा के वर्तमान सत्र में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के हमलावर तेवरों ने भजनलाल सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। सदन में मंत्रियों के जवाबों के दौरान जूली द्वारा किए जा रहे तीखे सवालों और तथ्यों के साथ की जा रही घेराबंदी ने सरकार की 'प्रश्नकाल' की तैयारियों की पोल खोल दी है। मंगलवार को सदन में स्थिति यह रही कि नेता प्रतिपक्ष के सवालों के सामने सरकार के मंत्री न केवल निरुत्तर नजर आए, बल्कि उनकी तिलमिलाहट ने साफ कर दिया कि सरकार के पास जनहित के मुद्दों पर कोई ठोस जवाब नहीं है।
महाराणा प्रताप के नाम पर राजनीति, विकास के नाम पर 'शून्य'
प्रश्नकाल के दौरान महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट विकास योजना का मुद्दा उठाते हुए जूली ने वित्तीय आंकड़ों के जरिए सरकार के छलावे को उजागर किया। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
"सरकार ने वर्ष 2024-25 के बजट में 100 करोड़ रुपये की घोषणा की थी। आज फरवरी 2026 आ चुका है, लेकिन जवाब में बताया गया कि मात्र 2 लाख 83 हजार रुपये ही खर्च हुए हैं। दो साल में 100 करोड़ के बजट के मुकाबले यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान भी नहीं है। क्या महाराणा प्रताप के नाम पर केवल राजनीति होगी या विकास भी दिखेगा?" जूली ने स्पष्ट किया कि विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
पशु चिकित्सा के आंकड़ों में 'फर्जीवाड़े' का आरोप
इससे पूर्व, चूरू विधानसभा क्षेत्र में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों से जुड़े पूरक प्रश्न पर सदन में भारी हंगामा हुआ। जब पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने आंकड़े पेश किए, तो जूली ने उन्हें तकनीकी आधार पर घेर लिया।
मंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा:
"सरकार का दावा है कि मात्र 3 यूनिट्स ने 15 फरवरी तक 36,549 पशुओं का इलाज कर दिया। यह व्यावहारिक रूप से असंभव है। एक दिन में एक यूनिट कितने पशु देख सकती है? यह सरासर फर्जी आंकड़े पेश कर सदन को गुमराह करने की कोशिश है।" जूली ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि कागजों में इलाज दिखाकर जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया जा रहा है।
बिना तैयारी और तथ्यों के चल रही सरकार
सदन की कार्यवाही के दौरान यह साफ दिखा कि नेता प्रतिपक्ष के गहन 'होमवर्क' के आगे मंत्रियों की 'कागजी बाजीगरी' नहीं चल पा रही है। जनहित के संवेदनशील मुद्दों पर सरकार के पास न तो कोई कार्ययोजना है और न ही सही तथ्य। जूली के प्रहारों ने यह साबित कर दिया है कि विपक्ष सदन से लेकर सड़क तक सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।