करवा चौथ पवित्र व्रत पर चंद्रमा नहीं दिखने से महिलाओं की बढी परेशानी
अलवर (/कमलेश जैन) लक्ष्मणगढ़ उपखंड क्षेत्र में करवा चौथ जैसे पवित्र व्रत में बादलों एवं ओस के कारण चंद्रमा का दर्शन न हो पाना महिलाओं के लिए एक बड़ी मानसिक परेशानी बन गई, क्योंकि शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चाँद देखने के बाद ही उपवास तोड़ा जाता है।
महिलाओं को लगता है कि चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना उनका व्रत अधूरा रह जाएगा। व्रत पूरे दिन की निर्जला साधना होती है, और अंत में चाँद के दर्शन न मिलने से मानसिक चिंता बढ़ जाती है। यदि चतुर्थी के दिन चंद्रमा न दिखे या गलती से गलत समय देख लिया जाए, तो पौराणिक मान्यताओं में मिथ्या कलंक या दोष लगने का डर रहता है। महिलाओं के देर रात तक निराहार पानी न पीने के कारण स्वास्थ्य पर असर पडा हैं। रात्रि 12:00 बजे तक महिलाएं चाँद दिखने का इंतज़ार करती रही।
विद्वान शास्त्रियों के अनुसार भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं, इसलिए शिव मंदिर में या घर पर व्रतधारी महिलाओं को शिवजी की प्रतिमा के मस्तक पर स्थित चंद्रमा को देखकर अर्घ्य दे सकती हैं। चंद्रमा की दिशा (आमतौर पर पूर्व-दक्षिण) में मुख करके, उस दिशा का ध्यान करते हुए मानसिक रूप से उन्हें अर्घ्य देकर व्रत संपन्न कर सकती हैं। एवं चावल के आटे या थाली में चावल की ढेरी से चंद्रमा का आकार बनाकर, उस पर 'ओम सोमाय नमः' मंत्र का जाप करते हुए पूजा की जा सकती है।
आजकल तकनीकि के दौर में, व्हाट्सएप वेबसाइट्स के माध्यम से अन्य शहरों की लाइव मून साइटिंग देखकर कस्बे की व्रतधारी महिला ज्योति डंगायच , पूजा झालानी, अंकिता खारवाल, ज्योति सोनी, खुशबू गुप्ता, ममता चौहान, शिवानी झालानी ,सुशीला तिवारी, रीतू गुर्जर आदि महिलाओं ने डिजिटल तरीके से व्रत खोला। ज्योतिषियों के अनुसार, यदि चंद्रमा न दिखे तो भावना और समर्पण ही सबसे बड़ा व्रत है।