दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर '0'  एक्सीडेंट नई तकनीकी योजना

Feb 22, 2026 - 16:55
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दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर '0'  एक्सीडेंट नई तकनीकी योजना

नई दिल्ली (कमलेश जैन) दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए सरकार अब हाईवे सिस्टम को पूरी तरह स्मार्ट बना रही है। इसके तहत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को नई तकनीक से लैस किया जाएगा, जहां गाड़ियां एक-दूसरे से “बात” कर सकेंगी। इस योजना का उद्देश्य यह है कि ड्राइवर को पहले ही खतरे की जानकारी मिल जाए और एक्सीडेंट होने से पहले ही गाड़ी खुद प्रतिक्रिया दे सके।
सरकार का यह कदम भारत में रोड़ स्टेड के लिए एक बड़े बदलाव पर विचार किया जा रहा है। स्मार्ट कार, स्मार्ट रोड और रियल-टाइम डेटा के जरिए दुर्घटना को काफी हद तक कम करने की तैयारी है।
इस पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत V2X यानि ऑब्जर्वेशन टू इवरीथिंग तकनीक है। इसका मतलब है कि गाड़ी सिर्फ अलग-अलग गाड़ियों से ही नहीं, बल्कि प्लांट लाइट, साइनबोर्ड, पैदल चलने वालों और सड़क पर लगे सेंसर से भी जुड़ी रहेगी। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के नीचे और आसपास लाखों स्मार्ट सेंसर लगाए जाएंगे। इस सेंसर ने फ्लोरिडा के वैज्ञानिकों को आगे की स्थिति के बारे में तुरंत जानकारी दी जाएगी। यदि आगे अचानक प्लास्टिक जाम, आकस्मिक या विशिष्ट स्थिति है, तो पीछे आ रहे वाहन को दुर्घटना की तुरंत कोई संभावना नहीं है। 
इस प्रोजेक्ट में 6G नेटवर्क का भी ट्रायल किया जाएगा। 6G की सबसे बड़ी प्रकृति इसकी बेहद कम लेटेंसी है, यानी डेटा माइक्रोसेकंड में। ऐसी स्थिति में यदि ड्राइवर समय पर ब्रेक नहीं लगाता है, तो सिस्टम अपनी गाड़ी की स्पीड कम कर सकता है। पैकेज के मुताबिक, 6जी ट्रायल का पहला मानक दिसंबर 2026 तक वडोदरा-मुंबई सेक्शन पर शुरू हो सकता है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को क्या खास बनाता है
करीब 1,386 किलोमीटर लंबी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत का सबसे प्रीमियम स्मार्ट हाईवे बन रहा है। इसके 2026 की शुरुआत से लेकर पूरी तरह से तैयार होने की उम्मीद है। इसकी होने के बाद दिल्ली से मुंबई की दूरी सिर्फ 12 घंटे में तय की जा सकती है। इस एक्सप्रेसवे में 8 से 12 लेन की सुविधा और इलेक्ट्रिक पैकेज के लिए अलग-अलग ईवी लेन दी जाएगी। 
रास्ते में जगह-जगह ईवी रिजर्वेशन स्टेशन होंगे, जिससे इलेक्ट्रिक बूस्टर को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा सौर-पावर्ड स्ट्रीट लाइटिंग, साइंटिजेंट कैमिबिलिटी सिस्टम (आईटीएमएस) और रियल-टाइम्स रियाद जैसी सुई भी शामिल हैं। पर्यावरण की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। यह एशिया का पहला ऐसा हाईवे माना जा रहा है। पूरी रूट पर 20 लाख से ज्यादा पेड़ पौधे लगाए जा रहे हैं, यह प्रोजेक्ट सस्ता भी हो जाएगा।
भारत अब इस रेस में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की यात्रा करें तो हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से गुजरात और 13 पोर्ट और 8 बड़े हवाई अड्डों को जोड़ा जाएगा। इससे लॉजिस्टिक्स कास्ट कम होगी और आर्थिक संकट को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। 
इस प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन  पहले ही कह चुके हैं कि यहां नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका मानना ​​है कि भविष्य में इस एक्सप्रेसवे पर इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो और ट्रक भी चलेंगे, जिससे सस्ता होगा, एक्सपोर्ट स्टॉक और टूरिज्म को फायदा मिलेगा।
दिल्ली-एनसीआर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के माध्यम से 6जी और वी2एक्स तकनीक के साथ भारत की सड़कों को स्मार्ट, सुरक्षित और भविष्य की दिशा में बनाना एक बड़ा कदम साबित होने वाला है।

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