MLA ने जैसलमेर में कृषि कॉलेज खोलने की मांग की:विधानसभा में ओरण संरक्षण, डिग्गी अनुदान और सहकारी बैंक के वित्तीय संकट पर सरकार को घेरा
जयपुर/जैसलमेर। राज्य विधानसभा में वर्ष 2026-27 की बजट मांगों पर चर्चा के दौरान जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी ने जिले की ज्वलंत समस्याओं और विकास की संभावनाओं को प्रमुखता से रखा। विधायक भाटी ने सदन में स्पष्ट किया कि जैसलमेर का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब सरकार ग्राम हित, पर्यावरण संरक्षण और किसान की समृद्धि को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखे।
राजस्व मुद्दे: 'मुहबोली' जमीनों को रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग
विधायक ने राजस्व विभाग से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बोलते हुए कहा कि जैसलमेर का विशाल भू-भाग मुख्य रूप से पशुपालन पर टिका है। उन्होंने सेटलमेंट काल की विसंगतियों पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित मांगें रखीं:
- ओरण-गोचर का संरक्षण: सेटलमेंट के समय छूट गई 'मुहबोली ओरण, गोचर और नदी-नालों' को तुरंत राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए ताकि स्थानीय असंतोष समाप्त हो।
- लंबित पत्रावलियां: 17,000 बीघा ओरण भूमि आरक्षित करने के सरकार के कदम का स्वागत करते हुए उन्होंने शेष 20 अन्य ओरण पत्रावलियों के शीघ्र निस्तारण की मांग की।
- भूमि आवंटन में सुधार: रामगढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि तकनीकी त्रुटि के कारण निजी कंपनियों को गांवों के बिल्कुल पास भूमि आवंटित कर दी गई है। उन्होंने ग्रामीणों के भविष्य और आवास विस्तार को देखते हुए इन आवंटनों को गांव से दूर स्थानांतरित करने का आग्रह किया।
कृषि क्रांति: 6 सूत्री मांग पत्र के जरिए आधुनिक खेती पर जोर
जैसलमेर में फसल उत्पादन में हुई चार गुना वृद्धि का हवाला देते हुए विधायक भाटी ने कृषि क्षेत्र के कायाकल्प के लिए 6 सूत्री एजेंडा पेश किया:
- शिक्षा: आधुनिक तकनीक के लिए जैसलमेर में कृषि महाविद्यालय और रामगढ़ में सहायक निदेशक कृषि कार्यालय की स्थापना।
- सिंचाई (MKSY): जिले के विशाल क्षेत्रफल को देखते हुए वर्तमान 2200 डिग्गियों के लक्ष्य को बढ़ाना।
- अनुदान: डिग्गी निर्माण पर अनुदान हरियाणा की तर्ज पर देने और पिछले 11 माह से लंबित भुगतान को तुरंत जारी करने की मांग।
- उर्वरक आपूर्ति: यूरिया और डीएपी की किल्लत दूर करने के लिए विशेष रैक की व्यवस्था।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर: सुथार मंडी तक 15 किमी लंबी सड़क के विस्तार और मरम्मत के लिए पृथक बजट।
- तकनीकी मार्गदर्शन: किसानों को नई पद्धतियों से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण।
सहकारिता संकट: बैंक का NPA ₹200 करोड़ पार, वित्तीय मदद की गुहार
विधायक ने जैसलमेर सहकारी बैंक की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति पर सदन को सचेत किया। उन्होंने बताया कि:
- बैंक का NPA लगभग 200 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जिससे तरलता का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
- किसानों के भुगतान रुकने से आमजन में भारी रोष है।
समाधान के प्रस्ताव:
- अपैक्स बैंक और नाबार्ड से लंबित ड्रॉल राशि का तुरंत पुनर्भरण किया जाए।
- बैंक में सरकारी हिस्सेदारी को 13% से बढ़ाकर 25% किया जाए।
- ऋण माफी मद की शेष 23 करोड़ रुपये की राशि तुरंत जारी की जाए।
विधायक का कथन: "जैसलमेर केवल एक जिला नहीं, बल्कि अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। यदि किसान को सही समय पर खाद, पानी और वित्तीय सहायता मिले, तो यह मरुधरा स्वर्ण उगल सकती है।"