टोल प्लाजा पर कटेगा ई-चालान, वाहनों के दस्तावेज की जांच सेकंडो में
दिल्ली (कमलेश जैन) हर दिन लाखों वाहन टोल प्लाजा से होकर गुजरते हैं। तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे ने यात्रा को आसान जरूर बनाया है। लेकिन अब नियमों की निगरानी भी उतनी ही सख्त हो गई है।
नई व्यवस्था के तहत यदि गाड़ी के दस्तावेज अधूरे या एक्सपायर हैं, तो टोल पार करते ही ई-चालान दर्ज हो सकता है।
सरकार ने ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू करना शुरू कर दिया है, जिसके जरिए वाहन की पूरी जानकारी सेकंडों में जांची जाएगी। अब बिना वैध बीमा, पॉल्यूशन या फिटनेस सर्टिफिकेट के सड़क पर निकलना महंगा पड़ सकता है।
कैसे काम करेगा ई-डिटेक्शन सिस्टम?
इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे पर डिजिटल सिस्टम से की जा रही है। टोल प्लाजा पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो गुजरते वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे।
स्कैन होते ही वाहन का डेटा केंद्रीय डेटाबेस से मैच होगा। इसमें बीमा, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट की वैधता की जांच तुरंत की जाएगी।
यदि किसी दस्तावेज की वैधता खत्म पाई गई या रिकॉर्ड अधूरा मिला, तो सिस्टम अपने आप ई-चालान जनरेट कर देगा। पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड है। और इसमें किसी कर्मचारी की मैनुअल दखल की जरूरत नहीं होगी।
किन रूटों से होगी शुरुआत?
शुरुआत फिलहाल बड़े और व्यस्त एक्सप्रेसवे से की जा रही है। जैसे-जैसे सिस्टम सफल होगा, इसे अन्य हाईवे और प्रमुख मार्गों तक विस्तारित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और ऐसे वाहनों को रोकना है जो नियमों का पालन नहीं करते। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल निगरानी से नियमों का पालन बेहतर होगा।
यदि किसी वाहन का मोटर इंश्योरेंस वैध नहीं है, तो करीब 2000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा उल्लंघन करने पर यह राशि और अधिक हो सकती है। बीमा न केवल कानूनी आवश्यकता है, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा भी देता है। इसलिए इसकी वैधता समय पर जांचना जरूरी है
अगर वाहन के पास वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (नहीं है, तो लगभग 10 हजार रुपये तक का चालान हो सकता है। प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत यह सर्टिफिकेट अनिवार्य है। इसका उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा करना और वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करना है।
कमर्शियल और कुछ निजी वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी होता है। यदि यह एक्सपायर पाया गया, तो पहली बार में 5000 रुपये और दोबारा गलती पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह सर्टिफिकेट वाहन की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा मानकों की पुष्टि करता है।
बिना वैध परमिट के वाहन चलाने पर भी लगभग 10 हजार रुपये का जुर्माना तय है। यह खासकर व्यावसायिक वाहनों पर लागू होता है। सभी जुर्माने सीधे वाहन मालिक के नाम दर्ज होंगे और उनकी जानकारी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी। इसलिए रजिस्ट्रेशन डिटेल्स अपडेट रखना बेहद जरूरी है।
एक्सप्रेसवे का उपयोग करते हैं, ध्यान रखें:
- अपने वाहन के सभी दस्तावेज ऑनलाइन चेक करें।
- बीमा, और फिटनेस सर्टिफिकेट की एक्सपायरी डेट समय पर देखें।
- समय रहते रिन्यूअल करा लें।
- रजिस्ट्रेशन और मोबाइल नंबर अपडेट रखें।
कई लोग सोचते हैं कि टोल पार कर लेने से काम चल जाएगा, लेकिन अब डिजिटल निगरानी में ऐसी कोई गुंजाइश नहीं है।
चालान भरने में देरी का नुकसान
अगर ई-चालान जारी हो गया, तो उसे निर्धारित समय में भरना जरूरी है। देरी करने पर अतिरिक्त चार्ज जुड़ सकता है। कुछ मामलों में वाहन पर अन्य कानूनी कार्रवाई भी संभव है। इसलिए बेहतर यही है कि यात्रा से पहले ही सभी कागजात पूरे रखें।