विधायक द्वारा विधानसभा में मौजपुर ग्राम को नगर पालिका लक्ष्मणगढ़ में जोड़ने एवं लक्ष्मणगढ़ में हुई तोड़फोड़ के नुकसान पीड़ित लोगों को मुआवजा की मांग
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) राजगढ़- लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक मांगे लाल मीणा ने बुधवार को विधानसभा में नगर पालिका लक्ष्मणगढ़ में मौजपुर ग्राम को लगाए जाने की मांग को लेकर कहा कि मौजपुर में ही अधिकांश कार्यालय स्थित होने के बाद भी मौजपुर को नगर पालिका लक्ष्मणगढ से हटा दिया गया है ।जबकि लक्ष्मणगढ़ से इसकी दूरी मात्र 3 किलोमीटर ही है । फिर भी मौजपुर ग्राम को नगर पालिका लक्ष्मणगढ़ से हटाया जाना गलत है ।भौगोलिक स्थिति को मध्य नजर रखते हुए मौजपुर ग्राम को लक्ष्मणगढ़ नगर पालिका से जोड़े जाने की पूरजोर मांग की ।उन्होंने विधानसभा में बताया कि दूर दराज के गांव जो की कस्बे लक्ष्मणगढ़ से 10- 15 किलोमीटर दूर है। इन गांवों को जोड़ा गया है इसका क्या औचित्य है।
नगर पालिका द्वारा बावड़ी से भगत सिंह सर्किल तक अतिक्रमण के नाम से हटाए गए पिछले दिनों जनवरी माह में मकानों एवं दुकानों को ध्वस्त के बाद पूर्व में दो बार राजगढ़ -लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक मांगेलाल मीणा ने विधानसभा में गलत बताया।
एक बार फिर विधानसभा में उन्होंने तुगलकी तोड़फोड़ को लेकर जांच एवं बाजार दर से पीड़ितों को मुआवजे की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि पी पी मोड पर बाईपास का सर्वे हो चुका है। इसके बाद भी यह तोड़-फोड़ की गई है। जबकि 1954 के नक्शे में 18 फिट का रास्ता दर्ज है। पंचायत राज 1959 में गठन हुआ है। यहां की गई तोड़फोड़ से प्रभावित पीडितो लोगों को मुआवजा देने की मांग तीसरी बार की है।
क्षेत्र के स्थानीय विधायक मांगेलाल मीणा ने विधानसभा में जांच की मांग कर हित धारकों को मुआवजा राशि दी जाने की मांग राज्य सरकार से की है। पीड़ित लोगों की आवाज विधानसभा में उठाकर बेघर या बेरोजगार हो गए लोगों ने क्षेत्रीय विधायक का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि निर्माण वैध था प्रभावित पक्ष मुआवजे का हकदार है। यह मांग तीसरी बार मेरे द्वारा विधानसभा में उठाई गई हैं ।यह एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है। जब प्रशासन अतिक्रमण के नाम पर मकान एवं दुकानों के वैध दस्तावेजों एवं राजस्थान हाई कोर्ट के स्टे को नकारते हुए मकान एवं दुकानों को ध्वस्त कर इसके पीछे छिपे मानवीय पक्ष को नजरअंदाज किया है।
वर्षों से बसे हुए आवास या रोजी-रोटी का अचानक छिन जाना किसी भी परिवार के लिए एक मानसिक और आर्थिक आपदा जैसा है।