मायरा भरने सजी-धजी बैलगाड़ियों से निकले भाई:थाल में रखे 51 लाख कैश, सोने-चांदी के गहने; देखिए रस्म की दो तस्वीरें
भीलवाड़ा/बीकानेर: राजस्थान की माटी में भाई-बहन के स्नेह और 'मायरा' (भात) भरने की परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी सदियों पहले थी। हाल ही में प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों से ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच एक खूबसूरत सेतु बना दिया। एक तरफ भीलवाड़ा में पुरानी संस्कृति की झलक दिखी, तो दूसरी तरफ बीकानेर में एक भाई के 'बड़े दिल' ने सबको चौंका दिया।
1. भीलवाड़ा: लग्जरी कारों के दौर में जब बैलगाड़ियों पर निकली भात की रस्म
भीलवाड़ा की सड़कों पर उस वक्त लोग ठिठक गए, जब सजी-धजी बैलगाड़ियों का एक लंबा काफिला लोक धुनों पर नाचते-गाते निकला। यह नजारा किसी फिल्म का नहीं, बल्कि माली परिवार द्वारा अपनी बहन के घर ले जाए जा रहे मायरे का था।
- परंपरा का सम्मान: माणिक्य नगर के कालू माली, भेरू माली और बंशी माली ने अपनी भांजी की शादी (राधे-श्याम वाटिका) के लिए बैलगाड़ियों को चुना।
- पुरानी यादें ताजा: कालू माली ने बताया कि आज के दौर में बच्चे पुरानी परंपराएं भूलते जा रहे हैं। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए उन्होंने कारों के बजाय 5 बैलगाड़ियों पर सामान लादा।
- विशेष आकर्षण: मशक की धुन और कच्छी घोड़ी डांस करते कलाकारों ने पूरे 2 किलोमीटर के सफर को उत्सव में बदल दिया।
2. बीकानेर: किसान भाई ने थाली में सजाए 75 लाख, उमड़ पड़ा प्यार
बीकानेर के मूंडसर गांव में एक ऐसा मायरा भरा गया, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। यहाँ एक किसान भाई ने अपनी बहन के प्रति प्रेम दिखाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।
- क्या था मायरे में? स्वरूपदेसर गांव के कालूराम सियाग ने अपनी बहन के तीन बच्चों (दो बेटे और एक बेटी) की सामूहिक शादी में 51 लाख रुपये नकद और 25 लाख रुपये के सोने के जेवर भेंट किए।
- सोशल मीडिया पर चर्चा: 19 फरवरी को हुए इस कार्यक्रम में जब मामा ने थाल भरकर नकदी और गहने रखे, तो वहां मौजूद ग्रामीण दंग रह गए। लोगों ने इस पल को अपने कैमरों में कैद किया, जो अब वायरल हो रहा है।
- भावुक पल: रेतीले धोरों के बीच भाई के इस 'बड़े दिल' ने साबित कर दिया कि रिश्तों की गर्माहट आज भी कायम है।