SC, ST मुकदमे में फर्जी फंसाने वाले वकील को विशेष न्यायाधीश ने सुनाई उम्रकैद की सजा, 5 लाख 10 हजार का लगा जुर्माना

Aug 21, 2025 - 13:20
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SC, ST मुकदमे में फर्जी फंसाने वाले वकील को विशेष न्यायाधीश ने सुनाई उम्रकैद की सजा, 5 लाख 10 हजार का लगा जुर्माना

 लखनऊ (कमलेश जैन) अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न अधिनियम और दुराचार जैसे मामलों में झूठा फंसाकर लोगों का जीवन बर्बाद करने के एक प्रकरण में लखनऊ की विशेष अदालत के एडीजे विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। इस निर्णय में आरोपी अधिवक्ता को आजीवन कारावास की सजा के साथ ₹5,10,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
विशेष लोक अभियोजक अरविंद मिश्रा ने बताया कि लखनऊ के एसीपी राधारमण सिंह ने पूजा रावत द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे की विवेचना के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर एक प्रकीर्ण वाद (सुपुर्दन प्रार्थना पत्र) दाखिल किया था। एसीपी राधारमण सिंह के अनुसार, पूजा रावत ने लखनऊ निवासी अरविंद यादव और उनके भाई अवधेश यादव के विरुद्ध अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि किराए के कमरे के कब्जे को लेकर पूजा रावत और अधिवक्ता परमानंद गुप्ता ने आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। जांच में यह पूरी घटना असत्य पाई गई।
छेड़छाड़ जैसे झूठे मुकदमे कराए दर्ज
मुकदमे की कार्यवाही के दौरान पूजा रावत ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर स्वीकार किया कि वह गोरखपुर से लखनऊ आई थी। और अधिवक्ता परमानंद गुप्ता की पत्नी के ब्यूटी पार्लर में काम करने लगी थी। परमानंद गुप्ता और अरविंद यादव के बीच जमीनी विवाद चल रहा था, जो सिविल कोर्ट में विचाराधीन था। इस कारण परमानंद गुप्ता ने पूजा रावत के अनुसूचित जाति से होने का दुरुपयोग करते हुए अरविंद यादव और उनके भाई के विरुद्ध दुराचार और छेड़छाड़ जैसे झूठे मुकदमे दर्ज कराए, जबकि ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई थी। इस संबंध में पूजा रावत ने न्यायालय में समाधान प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने अपना निर्णय सुनाया, जिसमें दोष सिद्ध होने पर अधिवक्ता परमानंद गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा तथा ₹5,10,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया। वहीं, झूठा आरोप लगाने वाली पूजा रावत को दोषमुक्त करते हुए रिहा कर दिया गया। न्यायालय ने उसे चेतावनी भी दी कि भविष्य में यदि वह अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के प्रावधानों का दुरुपयोग करते हुए आपराधिक षड्यंत्र के तहत बलात्कार या सामूहिक बलात्कार जैसे मुकदमे दर्ज कराती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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