जैन धर्म के श्वेताम्बर का पर्युषण समाप्त, दिगंबर का दसलक्षण शुरू
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
श्वेताम्बर जैन धर्म परंपरा अनुसार मीक्षामि दुक्कड़म अर्थात अगर मुझसे कोई भूल हुई हो तो उसके लिए दिल से माफी मांगता हूं क्षमायाचना के साथ श्वेताम्बर संप्रदाय का पर्युषण पर्व समाप्त हुआ। साधु संतों के सानिध्य में जगह जगह धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। वहीं गुरुवार से दिगम्बर संप्रदाय का दसलक्षण महापर्व की शुरुआत होगी। दशलक्षण पर्व में दस दिनों तक साधु संतों के सानिध्य में पूजा आराधना व धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। बताया जाता है कि जैन परंपरा में पर्युषण पर्व का विशेष महत्व है। अलग बात है कि श्वेताम्बर व दिगम्बर जैन संप्रदाय अलग अलग दिन तिथि में अलग अलग नाम से मनाते हैं। श्वेताम्बर संप्रदाय पर्युषण पर्व तो दिगम्बर दसलक्षण के रूप में मनाते हैं। आत्मशुद्धि का यह त्योहार में धार्मिक विधियां के साथ साथ अलग अलग दिन में एक धर्म का पालन किया जाता है। श्वेताम्बर सम्प्रदाय का पर्युषण पर्व बुधवार को क्षमा वाणी के साथ समाप्त हो गया। क्षमा याचना व मैत्री का त्योहार के अंतिम दिन में एक दूसरे को मीक्षामि दुक्कड़म कहकर क्षमायाचना की गई तथा मैत्री का हाथ बढ़ाया गया।
वहीं गुरुवार से दिगम्बर परंपरा अनुसार दसलक्षण महापर्व की शुरुआत होगी। दसलक्षण महापर्व में प्रतिदिन पूजा आराधना साधु संतों के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जायेगा। दस दिनों तक जैन अनुयायी आत्मकल्याण के मार्ग पर धर्मों का पालन करेंगे। साधु संतों के वाणी को आत्मसात करेंगे। जैन परंपरा अनुसार पहले दिन से लगातार उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन तथा उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन किया जायेगा। दसलक्षण पर्व की समाप्ति पर क्षमावाणी दिवस के रूप में मनाया जायेगा। दसलक्षण महापर्व के मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं का मंदिर में एकत्रित होकर श्रद्धालु धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।


