जैन समाज ने मनाया दशलक्षण धर्म काअंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर्व के साथ
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) जैन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष स्थान है। दिगंबर जैन भाद्रपद माह के अंतिम 10 दिनों में पर्यूषण पर्व का पालन दिगंबर जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा किया गया । भक्तो ने दृढ़ विश्वास रखते हुए आत्मशुद्धि तपस्या का संकल्प लिया। जैन परंपरा के अनुसार, आज ही के पवित्र दिन भगवान वासुपूज्य को निर्वाण प्राप्त हुआ था। जैन समाज में यह पर्व अत्यंत पवित्र और मोक्षधाम माना जाता है।
जैन मंदिर में प्रातः कालीन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की गई। महिलाएं निर्जल व्रत रखकर पूजन करती रहीं। जैन धर्म के दशलक्षण पर्व के तहत शनिवार को अनंत चतुर्दशी का पर्व पूजा अर्चना के साथ भगवान वासु पूज्य स्वामी का मोक्ष कल्याणक दिवस बहुत ही श्रद्धा भाव से पूजन पाठ किया। जैन समाज के लोगों ने प्रात: काल की बेला में श्री जी का अभिषेक, शांति धारा का पूजन किया। जैन मंदिर में भक्तों की अच्छी खासी भीड़ रही। जैन दर्शन में कहा गया है कि मनुष्य का शरीर से हटकर अपनी आत्मा में दृष्टि लगाना ही उत्तम ब्रह्मचर्य है।
पर्युषण पर्व के अंतिम दिन भक्ति रस में दिगंबर जैन समाज डूबा रहा । पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी के उपलक्ष्य में संध्या में भगवान का दिव्य अभिषेक किया।अभिषेक के जल से प्रक्षालित हुई लांग की माला को
बोली लगाकर बोली दाता को पहनाई गई।
उसके बाद सामूहिक आरती की गई। दश दिन के पर्व पर पूरा समाजभक्तिमय रहा। इस पर्व पर जैनधर्मावलंबियों ने बाहर का भोजन व रात्रि भोजन का त्याग किया। पर्व में कई महिला एवं पुरुषों ने उपवास भी किया। पर्यूषण पर्व का अंतिम दिन अनंत चतुर्थी के साथ बड़े ही भक्तिमय एवं उल्लास से समापन किया गया। इसी पर्व की श्रृंखला में 8 सितंबर को जैन समाज द्वारा क्षमा वाणी पर्व मनाया जाएगा। कार्यक्रम में जैन समाज के महिला पुरुष एवं बच्चे मौजूद रहे।


