विधवा महिला दो महीने से मकान की शिकायत को लेकर भटक रही
अलवर (अनिल गुप्ता) राजस्थान सरकार भले ही महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी बेहतरी के लिए बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों को पूरी तरह खोखला साबित कर देती है। ऐसा ही मामला अलवर में सामने आया, जहां एक विधवा महिला अपने मकान की शिकायत के लिए पिछले दो महीने से अधिकारियों के चक्कर काट रही है। लेकिन उसे आज तक समाधान नहीं मिला
कौशल ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहली किस्त मिल चुकी है, लेकिन दूसरी और तीसरी किस्त अब तक जारी नहीं हुई। विभाग के अधिकारी सिर्फ इतना कहकर टाल देते हैं कि “जल्दी किस्त मिल जाएगी”, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कौशल का मकान पूरी तरह ढह चुका है और वह अपनी पांच बेटियों सहित सड़क पर रहने को मजबूर है।
परिवार के पास न रहने को सुरक्षित जगह है, न ही आर्थिक स्थिति इतनी है कि वह अपने दम पर निर्माण कार्य शुरू कर सके। महिला का स्पष्ट आरोप है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सहायता की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन जब वास्तव में किसी जरूरतमंद विधवा को मदद चाहिए, तब सिस्टम पूरी तरह नाकाम साबित होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की पोल खोलता है। सवाल यह है कि क्या सरकार एक विधवा महिला और उसकी पांच बेटी की पुकार सुनेगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा रह जाएगा?
इस घटना ने प्रशासनिक उदासीनता और महिला कल्याण योजनाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


