लगातार 43वीं सारस गणना पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान हमारा है गौरव- गृह राज्यमंत्री

Apr 21, 2026 - 19:42
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लगातार 43वीं सारस गणना पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान हमारा है गौरव- गृह राज्यमंत्री

भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेड़म मंगलवार को भरतपुर के एक दिवसीय दौरे पर रहे। इस दौरान केवलादेव नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी द्वारा केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में आयोजित 43वीं सारस गणना कार्यक्रम में उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि पिछले 43 वर्षों से सारस गणना का यह सतत कार्य पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि भरतपुर, राजस्थान और देश की राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण, विकास और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने केवलादेव नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी अध्यक्ष एड. कृष्ण कुमार अरोड़ा को बधाई देते हुए कहा कि वर्षों से पक्षियों एवं वन्यजीवों की इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित किया जा रहा है, जो हमारी संस्कृति, परंपरा और इतिहास को सहेजने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न केवल प्रकृति का संरक्षण होता है, बल्कि मानव जीवन का संतुलन भी बना रहता है।
राज्यमंत्री ने कहा कि यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान हमारा गौरव है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि साइबेरियन सारस की संख्या में कमी एक गंभीर विषय है, जिसका मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग, कम वर्षा और जल की कमी है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं पर्यटन विकास के लिए अनेक कार्य किए जा रहे हैं। केवलादेव घना पक्षी विहार के साथ-साथ बंध बारैठा, डीग जल महल, धार्मिक स्थलों एवं अन्य धरोहरों को देखने देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को गाइड, होटल और टैक्सी जैसी सेवाओं के माध्यम से रोजगार प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि वैर के सफेद महल एवं फुलवाडी के सौंदर्यकरण और जीर्णाेद्धार के कार्य जारी हैं, वहीं बंध बारैठा में बायोलॉजिकल पार्क एवं नगर वन विकसित किए जा रहे हैं।
राज्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भरतपुर के समग्र विकास हेतु अनेक परियोजनाएं प्रगतिरत हैं। उन्होंने बताया कि एक महत्वपूर्ण जल परियोजना के अंतर्गत भरतपुर, सीकरी, बंध बारैठा बांध, धौलपुर, अलवर सहित पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को जोड़ा गया है, जिससे सिंचाई, पेयजल, उद्योग और पर्यावरण संरक्षण के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा। इस परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार के बीच एमओयू हो चुका है तथा प्रथम चरण का कार्य पूर्ण हो गया है, जबकि द्वितीय चरण के टेंडर प्रक्रिया में हैं।
पुस्तक किया विमोचन-
इस अवसर पर राज्यमंत्री ने डॉ. एमएम त्रिगुणायत एवं डॉ. कृतिका त्रिगुणायत द्वारा लिखित पुस्तक “पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण जैविकी” का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के उपरांत राज्यमंत्री ने सारस के नवजात चूजों को देखा तथा उनकी देखभाल के लिए वन विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। डीएफओ चेतन कुमार बीवी ने बताया कि 43वीं सारस गणना रिपोट घना पक्षी विहार में साईबेरियन सारस संख्या 22 और भरतपुर व डीग जिले के वेटलेण्ड क्षेत्र में 79 से बढ़कर 81 हो गई है। 
इस मौके पर डीटीओ अभय मुदगल, समिति संरक्षक काका रघुराज सिंह, अध्यक्ष कृष्ण कुमार अरोड़ा, चीफ कोऑर्डिनेटर आनंद शर्मा, पूर्व डीएफओ पुष्पेंद्र खुंटेला सहित वन्यजीव प्रेमी, विद्यार्थी, संबंधित विभागों के अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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