अलवर मेडिकल कॉलेज में तानाशाही: रात 9 बजे तक ली ड्यूटी, फिर वॉट्सएप पर मैसेज भेजकर 24 संविदा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

May 30, 2026 - 12:53
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अलवर मेडिकल कॉलेज में तानाशाही: रात 9 बजे तक ली ड्यूटी, फिर वॉट्सएप पर मैसेज भेजकर 24 संविदा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

अलवर, (30 मई)। अलवर मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा संविदा कर्मियों के साथ किए गए एक कथित अमानवीय और तानाशाही रवैये का मामला सामने आया है। कॉलेज प्रबंधन ने संविदा पर कार्यरत 24 नर्सिंग ऑफिसर्स और लैब टेक्नीशियनों को बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के अचानक नौकरी से कार्यमुक्त (Terminated) कर दिया है। इस फैसले के विरोध में आज शनिवार सुबह से ही पीड़ित कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मेडिकल कॉलेज परिसर में एकत्रित होकर प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन किया।

  • रात को वॉट्सएप पर आया 'फरमान'

संविदा प्लेसमेंट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष यश ने आपबीती बताते हुए कहा: "हम सभी कर्मचारी रोजाना की तरह शुक्रवार रात 9 बजे तक अस्पताल में पूरी निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी कर रहे थे। ड्यूटी खत्म कर जब हम घर पहुंचे, तो कुछ ही देर बाद अचानक हमारे वॉट्सएप पर एक सरकारी मैसेज आया। मैसेज में लिखा था कि 'कल से नौकरी पर आने की जरूरत नहीं है'। रात के वक्त आए इस अचानक फरमान ने हम सभी 24 कर्मचारियों के पैरों तले जमीन खिसका दी और हमारी रात की नींद उड़ गई।"

  • 2 साल के अनुबंध का सरेआम उल्लंघन

कर्मचारियों और एडवोकेट सत्यवीर गुर्जर ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से गैर-कानूनी और एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि इन सभी 24 कर्मचारियों का चयन फरवरी 2025 में पूरी विधिक प्रक्रिया के तहत 2 साल के अनुबंध (Contract) पर किया गया था। ऐसे में अनुबंध की अवधि खत्म होने से पहले, बिना किसी नोटिस या स्पष्टीकरण के महज कुछ ही महीनों में इस तरह नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाना सरासर अन्याय और अमानवीयता है।

  • आर-पार की लड़ाई का ऐलान: तुरंत बहाली की मांग

शनिवार सुबह मेडिकल कॉलेज परिसर में हुए इस उग्र प्रदर्शन के दौरान एडवोकेट सत्यवीर गुर्जर और एसोसिएशन के नेतृत्व में पीड़ित नर्सिंग ऑफिसर्स और लैब टेक्नीशियनों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। आंदोलनकारी कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सभी 24 प्रभावित कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से वापस काम पर नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह विरोध और संघर्ष जारी रहेगा।

कर्मचारियों ने इस मामले में राज्य सरकार और उच्च चिकित्सा अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।

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