भीलवाड़ा: चारागाह भूमि का सार्वजनिक रास्ता बंद करने पर फूटा आक्रोश, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
गुरला (भीलवाड़ा) | बद्री लाल माली 14 जुलाई 2026
ग्राम पंचायत दुदिया के राजस्व ग्राम तगड़िया में पशुओं के चरने की भूमि (चारागाह) तक जाने वाले वर्षों पुराने सार्वजनिक रास्ते को कुछ रसूखदारों द्वारा बंद करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस अवैध अतिक्रमण से आक्रोशित तगड़िया ग्राम के सैकड़ों ग्रामीणों ने भीलवाड़ा जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर रास्ता खुलवाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
लोहे की तार-जाली लगाकर रोका मवेशियों का रास्ता
जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि खसरा संख्या 9 का सार्वजनिक आम रास्ता वर्षों से ग्रामीणों और पशुपालकों द्वारा अपने मवेशियों को चारागाह भूमि तक ले जाने के लिए उपयोग में लिया जा रहा है। लेकिन हाल ही में कुछ असामाजिक तत्वों ने इस सार्वजनिक मार्ग पर अवैध रूप से लोहे की तार-जाली और अन्य अवरोध खड़े कर दिए हैं। इस वजह से गांव के पशुपालकों, आम राहगीरों और बेजुबान मवेशियों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे पशुपालकों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।
गोचर बचाओ फाउंडेशन ने संभाला मोर्चा
ग्रामीणों ने 'गोचर बचाओ फाउंडेशन' के राष्ट्रीय संयोजक गोटू सिंह मंगलपुरा के नेतृत्व में जिला प्रशासन से मिलकर मांग की है कि इस सार्वजनिक मार्ग को बिना किसी देरी के अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। साथ ही, दोषियों के विरुद्ध राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम (Rajasthan Land Revenue Act) एवं अन्य लागू कानूनी धाराओं के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई सार्वजनिक संपत्ति या गोचर भूमि पर आंख उठाने की हिम्मत न कर सके।
"सार्वजनिक रास्ते को इस तरह अवैध रूप से अवरुद्ध करना पूरे ग्रामवासियों और पशुपालकों के अधिकारों का सीधा हनन है। यदि प्रशासन ने इस पर शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करते हुए रास्ते को पुनः बहाल नहीं कराया, तो ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे।"
— गोटू सिंह मंगलपुरा, राष्ट्रीय संयोजक (गोचर बचाओ फाउंडेशन)
ये ग्रामीण रहे उपस्थित
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान रतनलाल, भेरूलाल, प्रभु, शंकर, नदा, ऊदा, सोहन, गंगाराम सहित सैकड़ों की संख्या में तगड़िया गांव के ग्रामीण और पशुपालक उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बेजुबान पशुओं का यह रास्ता नहीं खोला गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


