किशनगढ़बास में पुलिस व खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई: 545 किलो बदबूदार सिंथेटिक पनीर कराया नष्ट
खैरथल (हीरालाल भूरानी) 14 जुलाई 2026
खैरथल-तिजारा सहित अलवर जिले के इलाकों में सिंथेटिक दूध, मिलावटी पनीर, कलाकंद और अन्य दूषित खाद्य पदार्थों का कारोबार धड़ल्ले से पैर पसार रहा है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। इस बीच, पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग कभी-कभार छोटी-मोटी कार्रवाई कर वाहवाही लूटने में मशगूल है, जिसके कारण मिलावटखोरों के हौसले लगातार बुलंद बने हुए हैं।
इसी कड़ी में आज, आयुक्तालय खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण (जयपुर) के दिशा-निर्देशों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अरविंद गेट के नेतृत्व में किशनगढ़ पुलिस व खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने नाकेबंदी के दौरान भारी मात्रा में बदबूदार सिंथेटिक पनीर जब्त कर उसे नष्ट करवाया।
ईको गाड़ी में प्लास्टिक की 15 केनों में भरा था 'सफेद जहर'
खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव ने बताया कि किशनगढ़ पुलिस गश्त पर थी, तभी संदेह के आधार पर एक सफेद रंग की ईको गाड़ी (नंबर: RJ 40 CB 9889) को रोका गया। गाड़ी की तलाशी लेने पर उसमें प्लास्टिक की करीब 15 केनें मिलीं, जिनमें 545 किलो बदबूदार सिंथेटिक पनीर भरा हुआ था। पुलिस ने तुरंत इसकी सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को दी, जिसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर पनीर की जांच की। जांच में पनीर पूरी तरह अस्वच्छ, अत्यधिक दुर्गंधयुक्त और सिंथेटिक पाया गया।
नारनौल और झुंझुनू में खपाने की थी तैयारी
पुलिस पूछताछ में गाड़ी चालक आदिल खान (25) पुत्र एट मोहम्मद और उसके साथी मुनव्वर (20) पुत्र रजाक (दोनों निवासी ग्राम जरौली, तहसील तिजारा) ने कुबूल किया कि वे इस मिलावटी पनीर को नारनौल और झुंझुनू जिले के आसपास के बाजारों में ₹180 से ₹200 प्रति किलो के सस्ते दामों पर बेचने के लिए ले जा रहे थे।
जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर किया नष्ट
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI एक्ट-2006) के नियमों के तहत पनीर का सैंपल (नमूना) लिया। इसके बाद जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मौके पर ही जेसीबी मशीन की मदद से गहरा गड्ढा खुदवाया गया और सभी 15 केनों में भरे 545 किलो जहरीले पनीर को मिट्टी में दबाकर नष्ट कर दिया गया।
हालांकि, प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि ऐसी छिटपुट कार्रवाइयों से मिलावटखोरी पर लगाम कसना नामुमकिन है। जब तक बड़े स्तर पर फैक्ट्रियों और सप्लायरों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता की सेहत पर मंडराता यह खतरा टलने वाला नहीं है।


