रीको औद्योगिक क्षेत्र से हथेनी मार्ग बदहाल: 50-60 गांवों के हजारों ग्रामीणों की जान जोखिम में... गहरे और जानलेवा गड्ढों के कारण रोज हो रहे हादसे
एम्बुलेंस और स्कूल बसों का निकलना हुआ दूभर, प्रशासन मौन
भरतपुर (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) रीको औद्योगिक क्षेत्र से हथेनी की ओर जाने वाली मुख्य सड़क इन दिनों राहगीरों के लिए 'सड़क' नहीं बल्कि 'सफर-ए-दर्द' बन चुकी है। अपनी बदहाली के आंसू रो रही यह सड़क किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। मार्ग पर जगह-जगह इतने गहरे और जानलेवा गड्ढे हो चुके हैं कि वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। रही-सही कसर बरसात का मौसम पूरी कर देता है, जब इन गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है।
- चार राज्यों को जोड़ने वाला प्रमुख लिंक मार्ग
यह सड़क केवल स्थानीय आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि भरतपुर सहित मथुरा, आगरा और दिल्ली आने-जाने वाले 50 से 60 गांवों के हजारों ग्रामीणों का मुख्य लाइफलाइन मार्ग है। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में दोपहिया, चारपहिया वाहन, स्कूल बसें, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, मालवाहक वाहन और जीवनदायिनी एम्बुलेंस गुजरती हैं।
- बचा सिर्फ एक फुट का रास्ता, आमने-सामने की टक्कर का डर
सड़क की हालत इस कदर खस्ता हो चुकी है कि कई स्थानों पर गड्ढों के कारण वाहनों के निकलने के लिए मात्र एक फुट का रास्ता ही शेष बचा है। ऐसे में दोनों दिशाओं से आने वाले वाहनों को एक ही पटरी से गुजरना पड़ता है। इस वजह से हर वक्त आमने-सामने की भीषण टक्कर का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां आए दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
मरीजों पर भारी पड़ रही लापरवाही
- सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आपातकालीन स्थिति में अस्पताल ले जाए जा रहे मरीजों और एम्बुलेंस को इस मार्ग पर रेंग-रेंग कर चलना पड़ता है। खराब सड़क और जलभराव के चलते मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
युद्ध स्तर पर मरम्मत की मांग
क्षेत्र के ग्रामीणों और वाहन चालकों ने जिला प्रशासन, रीको प्रबंधन तथा संबंधित लोक निर्माण विभाग (PWD) से गुहार लगाई है कि जनहित और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग की युद्ध स्तर पर मरम्मत कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन गड्ढों को भरकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


