मांदरीन मौहल्ले मे मकानों के पीछे स्थित पहाडियों पर अवैध खनन जारी।जिम्मेदार विभाग मौन
राजगढ़ (अलवर, राजस्थान) अनिल गुप्ता 14 जुलाई 2026
राजगढ़ कस्बे के मांदरीन मोहल्ले में इन दिनों भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यहाँ मकानों और दुकानों के पीछे स्थित बेशकीमती सरकारी पहाड़ियों और वन क्षेत्र पर अवैध रूप से खनन कर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे खेल में सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) द्वारा अवैध खनन के खिलाफ दिए गए सख्त कार्रवाई, सजा और जुर्माने के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
हैमरों और ब्लास्टिंग से खोखली की जा रही हैं पहाड़ियाँ
कस्बे के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि बागड़ी कबाड़ी के मकान के पास और गंगाबाग मोड़ पर कुछ रसूखदार लोगों द्वारा अवैध खनन को धंधा बना लिया गया है। यहाँ दिन-रात हैमरों और भारी मशीनों की मदद से पहाड़ियों को तोड़ा जा रहा है, वहीं कई जगहों पर अवैध ब्लास्टिंग (विस्फोट) भी की जा रही है। इस अवैध खनन के जरिए निकलने वाले पत्थरों और मोरम को मोटे दामों पर बेचकर माफिया चांदी कूट रहे हैं, और साथ ही खनन की गई सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा (अतिक्रमण) किया जा रहा है।
अधिकारियों को सब पता, फिर भी कार्रवाई के नाम पर 'सिफर'
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस गंभीर मामले की जानकारी वन विभाग और नगर पालिका के अधिकारियों को पहले से ही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा आंखें मूंद ली गई हैं। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई न होना, सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों और भू-माफियाओं की आपसी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
"अवैध खनन से जहाँ एक तरफ पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से कब्जे हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद भी स्थानीय प्रशासन का इस तरह मूकदर्शक बने रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"
— स्थानीय नागरिक व प्रबुद्ध वर्ग
सख्त कार्रवाई की उठी मांग
राजगढ़ के नागरिकों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि मांदरीन मोहल्ले में चल रहे इस अवैध खेल को तुरंत बंद कराया जाए। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने वाले भू-माफियाओं और उन्हें मूक संरक्षण देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम व पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।


