राजकीय सम्मान के साथ हुआ दिवंगत पुलिसकर्मी बाबूलाल का अंतिम संस्कार, संघर्षमयी रहा जीवन सफर
दोनों पैर गंवाने के बाद भी निभाते रहे ड्यूटी, बेटे की मौत का दर्द सीने में दबाए विदा हुए जांबाज बाबूलाल
राजगढ़ (अलवर/ अनिल गुप्ता) दौसा जिला पुलिस में तैनात और राजगढ़ के बैरेर निवासी पुलिसकर्मी बाबूलाल मीणा (57 वर्ष) का शुक्रवार को उनके पैतृक गांव में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। गुरुवार देर रात को उनका निधन हो गया था। अंतिम विदाई के समय अंत्येष्टि स्थल पर मौजूद पुलिस बल के जवानों ने 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर दिवंगत साथी को अंतिम सलामी दी, जिसके बाद पुत्र देशराज ने मुखाग्नि दी।
जांबाज पुलिसकर्मी की अंतिम यात्रा में पुलिस अधिकारियों, जवानों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित भारी संख्या में क्षेत्रवासी उमड़े और नम आंखों से विदाई दी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने बाबूलाल मीणा के सेवाकाल को याद करते हुए उन्हें एक अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित और समर्पित सिपाही बताया।
- ड्यूटी के दौरान कट गए थे दोनों पैर, पर जारी रहा सेवा का जज्बा
ग्रामीणों ने बताया कि बाबूलाल का जीवन बेहद संघर्षमयी और प्रेरणादायक रहा। वर्ष 2001 के करीब ड्यूटी के दौरान एक दर्दनाक हादसे में रेलवे ट्रैक पार करते समय उनके दोनों पैर कट गए थे। शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पुलिस महकमे के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ। वे लगातार अपनी सेवाएं देते रहे।
- जवान बेटे को खोने का दर्द भी झेला
शारीरिक लाचारी के साथ-साथ नियति ने बाबूलाल को गहरा पारिवारिक जख्म भी दिया। 20 नवंबर 2018 की देर शाम को अलवर के दाउदपुर फाटक के पास चलती ट्रेन के आगे जिन चार युवकों की मौत हुई थी, उनमें बाबूलाल का बेटा ऋतुराज मीणा भी शामिल था। जवान बेटे की असमय मौत का गहरा सदमा भी वे जिंदगी भर सीने में दबाए रहे।
- शोक में डूबा गांव, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
अंतिम विदाई के समय परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, जिन्हें ढांढस बंधाने के लिए उपस्थित हर ग्रामीण की आंखें छलक आईं। इस दौरान समाजसेवी दिनेश मीणा, सुनड्या पटेल, गब्बू राम, ओमप्रकाश, भौंरे लाल सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद रहे और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया।


