डॉक्टर की लापरवाही से एएनएम से साइबर ठगी: फर्जी नायब तहसीलदार बनकर मांगा स्टाफ का डेटा; फिर खाते से निकाले रुपए
जयपुर के झोटवाड़ा स्थित हाथोज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में साइबर ठगों ने सरकारी अधिकारी बनकर बड़ी ठगी की वारदात को अंजाम दिया। ठग ने पहले खुद को कलेक्ट्रेट का नायब तहसीलदार बताकर हॉस्पिटल के पूरे स्टाफ की जानकारी हासिल की। फिर उसी डेटा का इस्तेमाल कर एएनएम से 70 हजार रुपए की ठगी कर ली। मामले में डॉक्टर की ओर से बिना सत्यापन स्टाफ का डेटा साझा करने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी अनुसार- हाथोज पीएचसी में डेपुटेशन पर कार्यरत डॉ. मीनाक्षी सिंह के पास 13 जुलाई को दोपहर करीब एक बजे एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को कलक्ट्रेट का नायब तहसीलदार अशोक मीणा बताते हुए हॉस्पिटल की मरम्मत और निरीक्षण की बात कही। उसने पूरे स्टाफ के नाम और मोबाइल नंबर मांगे, जिन्हें डॉक्टर ने बिना किसी आधिकारिक सत्यापन के फोन पर ही उपलब्ध करा दिया।
- स्टाफ का डेटा मिलते ही एएनएम को बनाया निशाना
स्टाफ की लिस्ट मिलने के बाद साइबर ठग ने एएनएम कृष्णा यादव से संपर्क किया। उसने हॉस्पिटल परिसर के अंदर और बाहर के फोटो और वीडियो भेजने के लिए कहा। कृष्णा यादव को संदेह हुआ तो उन्होंने डॉ. मीनाक्षी सिंह से इसकी पुष्टि की। बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने इसे अधिकारियों की मांग बताते हुए जानकारी साझा करने के लिए कह दिया।
इसके कुछ समय बाद ठग ने फिर फोन किया और कहा कि हॉस्पिटल की मरम्मत के लिए 35-35 हजार रुपए भेजने हैं। इसके लिए बैंक खाता अपडेट करना होगा। जब एएनएम ने निजी खाते से सरकारी लेन-देन करने से मना किया तो आरोपी ने सस्पेंड करने और कलेक्टर को रिपोर्ट भेजने की धमकी दी। दबाव में आकर प्रक्रिया पूरी करते ही उनके खाते से 70 हजार रुपए निकल गए। ठग ने खुद को कलेक्ट्रेट का नायब तहसीलदार बताकर हॉस्पिटल परिसर के अंदर और बाहर के फोटो और वीडियो भेजने के लिए कहा था। इसके बाद खाते से रुपए निकाले थे।
- साइबर हेल्पलाइन की त्वरित कार्रवाई, 59 हजार रुपए बचाए
ठगी का पता चलते ही एएनएम कृष्णा यादव ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठग के बैंक खाते में 59 हजार रुपए होल्ड करवा दिए। हालांकि आरोपी इससे पहले 11 हजार रुपए निकालने में सफल रहा। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
- डॉक्टर पर उठे सवाल, शिकायत तक दर्ज नहीं कराई
मामले में यह भी सामने आया है कि डॉ. मीनाक्षी सिंह ने न तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और न ही अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने केवल विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में स्टाफ को सतर्क रहने का संदेश भेजा। घटना के बाद भी उन्होंने मामले पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से परहेज किया।
- डॉक्टर ने रखा अपना पक्ष
मामले में अपना पक्ष रखते हुए डॉ.मीनाक्षी ने कहा कि किसी भी सरकारी कार्मिक का नाम अथवा फोन नंबर जनसाधारण को भी उपलब्ध करवाया जाना विभाग की जिम्मेदारी है। ये घटना विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत व्यवहार की है। इसका ऑफिशियल ड्यूटी या अधिकारियों से किसी भी प्रकार का कोई संबंध जोड़ना अनुचित है।
- सीएमएचओ बोले- सूचना नहीं मिली, होगी जांच
सीएमएचओ प्रथम डॉ. रवि शेखावत ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी डॉ. मीनाक्षी सिंह की ओर से नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है और इसकी जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।


