मातृ मृत्यु दर पर लगेगी लगाम: प्रदेशभर में सभी गर्भवती महिलाओं की 5 दिवसीय सघन स्क्रीनिंग
गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की होगी नियमित निगरानी, लापरवाही पर आशा, एएनएम व सीएचओ की तय होगी जिम्मेदारी
प्रमुख शासन सचिव ने दिए निर्देश: लेबर रूम और ओटी गाइडलाइन की पालना हो सख्ती से, 24 घंटे में करना होगा मातृ मृत्यु का रिव्यू
सिरोही/जयपुर (रमेश सुथार)। प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है। प्रदेशभर में 15 जुलाई (बुधवार) से सभी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य मानकों की सघन स्क्रीनिंग के लिए 5 दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य जांचों का पूरा रिकॉर्ड रखकर उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाएगी।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए प्रदेशभर के चिकित्साधिकारियों की बैठक लेकर इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि फील्ड में कार्यरत आशा वर्कर, एएनएम और सीएचओ के माध्यम से स्क्रीनिंग का यह कार्य पूरी संवेदनशीलता से किया जाए। जांच व नियमित स्क्रीनिंग में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी और लापरवाही मिलने पर संबंधित कार्मिक व अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), चिकित्सा शिक्षा और निदेशालय स्तर के अधिकारियों सहित सभी जिलों के सीएमएचओ, आरसीएचओ और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। सिरोही जिला मुख्यालय से सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. एस.पी. शर्मा, आरसीएचओ डॉ. रितेश सांखला सहित बीसीएमओ व डीपीएमयू यूनिट के कार्मिक उपस्थित रहे।
12 सप्ताह में पंजीकरण और कम से कम 4 एएनसी जांचें अनिवार्य
प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना अत्यंत गंभीर है। गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि:
- प्रत्येक गर्भवती महिला का गर्भधारण के प्रथम 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाए और सभी सूचनाएं पीसीटीएस (PCTS) पोर्टल पर समय पर दर्ज हों।
- प्रत्येक गर्भवती की कम से कम चार गुणवत्तापूर्ण एएनसी (ANC) जांचें अनिवार्य रूप से कराई जाएं, जिसमें रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन, मूत्र परीक्षण और ब्लड शुगर की जांच शामिल हो।
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हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) के लिए बनेगा अलग ट्रैकिंग सिस्टम बैठक में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पूर्व सिजेरियन, जुड़वां गर्भ और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताओं वाले 'हाई रिस्क प्रेग्नेंसी' (एचआरपी) मामलों की समय पर पहचान के लिए अलग ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक एचआरपी महिला की नामवार सूची उपस्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला स्तर तक उपलब्ध रहेगी।
मातृ मृत्यु पर 24 घंटे में होगा प्रारंभिक रिव्यू, लेबर रूम होंगे सेनेटाइज
- श्रीमती गायत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया कि जिलों में मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना का 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक विश्लेषण कर 'मैटरनल डेथ रिव्यू' (MDR) किया जाएगा। लापरवाही पाए जाने पर तुरंत कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं, रक्त की उपलब्धता, प्रसव कक्ष और नवजात पुनर्जीवन उपकरणों को कार्यशील रखने के निर्देश दिए।
रेफरल केस में पूरी हिस्ट्री भेजना जरूरी: निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने चिकित्साधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि रेफरल केसों में मरीज के साथ संपूर्ण चिकित्सकीय विवरण (रेफरल पर्ची) अनिवार्य रूप से भेजा जाए।
लेबर रूम व ओटी की गाइडलाइन का हो पालन: मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम ने कहा कि लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर (ओटी) के लिए पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित की जाए। सभी सीएमएचओ समय-समय पर इनका सेनेटाइजेशन करवाना सुनिश्चित करें।


