सरकार के नए आदेशों के खिलाफ सड़कों पर उतरे निजी स्कूल, निकाली आक्रोश रैली; बोले- सरकार के आदेश अनावश्यक और कार्यक्षेत्र से बाहर

Jul 15, 2026 - 19:27
Jul 15, 2026 - 19:28
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सरकार के नए आदेशों के खिलाफ सड़कों पर उतरे निजी स्कूल,  निकाली आक्रोश रैली; बोले- सरकार के आदेश अनावश्यक और कार्यक्षेत्र से बाहर

राजशाला संबलन के नए निरीक्षण दिशा-निर्देशों का विरोध; 10 दिन में फैसला वापस न लेने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी,,,  कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

पाली (राजस्थान) राज्य सरकार द्वारा 'राजशाला संबलन' के तहत निजी स्कूलों के लिए जारी किए गए नए निरीक्षण दिशा-निर्देशों के विरोध में बुधवार को पाली जिले के अधिकांश निजी विद्यालय पूरी तरह बंद रहे। जिला निजी शिक्षण संस्थान के आह्वान पर आयोजित इस एक दिवसीय सांकेतिक बंद के दौरान शहर में एक विशाल आक्रोश रैली निकाली गई और कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर को राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

सरकार के आदेश अव्यावहारिक और कार्यक्षेत्र से बाहर

जिला निजी शिक्षण संस्थान के जिलाध्यक्ष प्रदीप दवे ने सरकार के नए आदेशों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ये दिशा-निर्देश पूरी तरह से अव्यावहारिक, अनावश्यक और विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, "यदि आगामी 10 दिनों के भीतर इन आदेशों को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र व व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।"

बढ़ता प्रशासनिक बोझ और आरटीई भुगतान में देरी

संस्थान के सचिव पुखराज शर्मा ने स्कूलों की व्यावहारिक समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा कि फीस विनियमन, आरटीई (RTE), पीटीए (PTA) और एसएलएफसी (SLFC) से जुड़ी लगभग सभी जानकारियां पहले से ही सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इसके बावजूद बार-बार नए प्रारूपों में सूचनाएं मांगकर स्कूलों पर अनावश्यक प्रशासनिक बोझ डाला जा रहा है।

इसके साथ ही, पदाधिकारियों ने आक्रोश व्यक्त किया कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन निजी स्कूलों को अभी तक आरटीई (RTE) प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया गया है।

"वादा नहीं भुगतान चाहिए" के नारों से गूंजा शहर

संस्थान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयशंकर त्रिवेदी ने बताया कि यह आक्रोश रैली लोढ़ा स्कूल से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। रैली में हजारों की संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर "वादा नहीं भुगतान चाहिए", "शिक्षा मंत्री होश में आओ" और "निजी शिक्षण संस्थानों पर अत्याचार बंद करो" जैसे गगनभेदी नारे लगाए।

इन मुख्य बिंदुओं पर है निजी स्कूलों को आपत्ति:-

  • अनावश्यक दोहराव: जब विभाग द्वारा पहले से ही वार्षिक पोर्टल-आधारित निरीक्षण किया जाता है, तो बार-बार अतिरिक्त भौतिक निरीक्षणों की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे शैक्षणिक कार्य बाधित होता है।
  • अव्यावहारिक सवाल: पाठ्यपुस्तकों और यूनिफॉर्म से जुड़े सरकारी प्रश्न वास्तविक और धरातलीय परिस्थितियों से मेल नहीं खाते।
  • अटका भुगतान: आरटीई के तहत मिलने वाले पुनर्भुगतान को तुरंत जारी किया जाए।

बंद को मिला व्यापक समर्थन

संयोजक हिम्मत सिंह, दलपत सिंह और भीम सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि निजी स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता के हमेशा पक्षधर रहे हैं, लेकिन ऐसे दमनकारी नियमों का विरोध करते हैं जो सुचारू शिक्षा व्यवस्था में बाधा डालें। आंदोलन के समर्थन में पाली जिले के आरबीएसई (RBSE) और सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध लगभग सभी निजी स्कूल बंद रहे।

इस आक्रोश रैली में हरवंश दवे, राजेंद्र आर्य, भीम सिंह, नारायण सिंह, भूपेंद्र सिंह, प्रवीण दाधीच, रमाकांत मिश्रा, अशोक जोशी, भरत निम्बार्क सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, स्कूल संचालक एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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