पेड़ हटाना बनी 'सफलता की कहानी': जहाजपुर नगर पालिका के दावों पर उठे सवाल, पट्टों की आस में भटक रहे लोग
जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) 16 जुलाई
जहाजपुर नगर पालिका द्वारा आयोजित 'शहरी सेवा शिविर-2026' अपनी शुरुआत के साथ ही विवादों और जन-चर्चाओं में घिर गया है। शिविर के तहत पालिका प्रशासन द्वारा जारी किए गए पहले ही प्रेस नोट ने नगरवासियों को हैरान कर दिया है। इस प्रेस नोट में आशापुरा माताजी मंदिर के पास सड़क पर गिरे एक नीम के पेड़ को हटाने की सामान्य कार्रवाई को पालिका द्वारा अपनी "बड़ी उपलब्धि" और "सफलता की कहानी" के रूप में पेश किया गया है। स्थानीय जनता का कहना है कि जनसुविधाओं और बुनियादी समस्याओं को हल करने के बजाय नगर पालिका केवल कागजी और औपचारिक उपलब्धियां गिनाने में व्यस्त है।
खाली पद के फेर में अटके पट्टे, जनता मायूस
शिविर से लोगों को जिन महत्वपूर्ण नागरिक सेवाओं और त्वरित राहत की उम्मीद थी, वे पूरी होती नजर नहीं आ रही हैं।
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अटके पड़े हैं काम: जानकारी के अनुसार, शहरी सेवा शिविर शुरू होने से ठीक पहले अधिशासी अधिकारी (ईओ) का पद खाली हो गया।
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एक भी पट्टा जारी नहीं: जिम्मेदार अधिकारी के न होने के कारण शिविर के दौरान अब तक किसी भी नागरिक को पट्टा जारी नहीं किया जा सका है। पट्टा वितरण और लंबित नामांतरण (म्यूटेशन) जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए लोग लगातार चक्कर काटने को मजबूर हैं।
नियमित काम को बताया 'ऐतिहासिक': नगरवासियों का कहना है कि आंधी या दुर्घटना से सड़क पर गिरे पेड़ को हटाना नगर पालिका की रोजमर्रा की सामान्य जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसे किसी विशेष कैंप की 'ऐतिहासिक सफलता' के रूप में ढोल पीटकर प्रचारित करना समझ से परे है।
प्राथमिकताओं से भटका प्रशासन, समस्याओं का अंबार
स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य आमजन को सीधे राहत पहुंचाना होना चाहिए था। लोगों की उम्मीद थी कि इस दौरान निम्नलिखित कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी:
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लंबित पट्टों का त्वरित वितरण और नामांतरण।
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कस्बे की चरमराई सफाई व्यवस्था में सुधार।
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टूटी सड़कों और बंद नालियों का जीर्णोद्धार।
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बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक कर प्रकाश व्यवस्था सुचारू करना।
लेकिन इन बुनियादी मुद्दों पर काम करने के बजाय प्रशासन केवल छोटे-मोटे कामों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने में लगा है।
शिविर के उद्देश्य को सार्थक बनाने की मांग
कस्बे के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि प्रशासन आत्ममुग्धता से बाहर निकले। यदि 'शहरी सेवा शिविर' वास्तव में जनता की समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए है, तो धरातल पर ठोस परिणाम दिखने चाहिए। लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द ईओ के रिक्त पद पर नियुक्ति की जाए ताकि रुके हुए पट्टों का वितरण हो सके और अन्य नागरिक सेवाओं का समयबद्ध निस्तारण करके शिविर के वास्तविक उद्देश्य को सार्थक बनाया जा सके।


