वृंदावन में ई-रिक्शा और टेंपो चालकों के आतंक के खिलाफ संतों की बैठक, बड़े आंदोलन की चेतावनी
वृंदावन (विष्णु मित्तल)। नगर के वृंदावन-छटीकरा मार्ग स्थित हनुमान टेकरी आश्रम में शुक्रवार को नगर के प्रमुख साधु-संतों की एक अति आवश्यक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता आश्रम के अधिकारी महंत दशरथ दास महाराज ने की। बैठक का मुख्य एजेंडा वृंदावन नगर और आसपास के क्षेत्रों में ई-रिक्शा और टेंपो चालकों द्वारा फैलाए जा रहे कथित आतंक, अनियंत्रित यातायात और तीर्थयात्रियों के साथ होने वाली अभद्रता पर अंकुश लगाना था। संतों ने इस समस्या पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो संत समाज एक बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होगा।
बैठक को संबोधित करते हुए हनुमान टेकरी आश्रम के अधिकारी महंत दशरथ दास महाराज ने कहा कि वृंदावन देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रतिदिन यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु ठाकुर बांके बिहारी जी और अन्य प्रमुख मंदिरों के दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से नगर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। छटीकरा मार्ग, अट्टला चुंगी, और परिक्रमा मार्ग पर ई-रिक्शा और टेंपो चालकों की मनमानी चरम पर है। ये चालक कहीं भी वाहन रोक देते हैं, जिससे घंटों लंबा जाम लगा रहता है। इस अव्यवस्था के कारण न केवल स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है, बल्कि बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी बेहद परेशान हैं।
बैठक में उपस्थित महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने प्रशासनिक उदासीनता पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने प्रशासन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा, "नगर में टेंपो और ई-रिक्शा चालकों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब संतों और श्रद्धालुओं का सड़कों पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है। आए दिन ये चालक नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं और विरोध करने पर अभद्रता और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। यदि पुलिस और परिवहन विभाग ने इन बेलगाम चालकों पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया, तो वृंदावन का समस्त संत समाज सड़कों पर उतरकर एक विशाल और उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।"
बैठक में शामिल अन्य वरिष्ठ संतों ने भी अपने विचार साझा किए। संतों का कहना था कि नगर में क्षमता से कई गुना अधिक ई-रिक्शा और टेंपो दौड़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश चालकों के पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही वाहनों के कागजात। कई नाबालिग और बाहरी तत्व भी बिना किसी सत्यापन के रिक्शा चला रहे हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बैठक में रामदास, नृसिंह दास, माधव दास, श्याम दास, मोहन दास, आर.एस. शर्मा, सुदामा दास, राधा रमण दास, रघुवीर दास, रामानुग्रह दास, रविकिशन दास, सुधीर दास, भगवान दास आदि मौजूद रहे।


