RGHS में बड़ी कार्रवाई: राजस्थान के 51 अस्पताल योजना से निलंबित, 24 पर 3 करोड़ का जुर्माना; जयपुर के मणिपाल, सोनी व नारायणा समेत 9 अस्पताल शामिल

Jul 17, 2026 - 20:05
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RGHS में बड़ी कार्रवाई: राजस्थान के 51 अस्पताल योजना से निलंबित, 24 पर 3 करोड़ का जुर्माना; जयपुर के मणिपाल, सोनी व नारायणा समेत 9 अस्पताल शामिल

जयपुर (राजस्थान) राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए प्रदेश के 51 निजी अस्पतालों को योजना से निलंबित (पैनल से बाहर) कर दिया है। इसके साथ ही, गंभीर गड़बड़ियां पाए जाने पर 24 अस्पतालों के खिलाफ करीब 3 करोड़ रुपये के जुर्माने और रिकवरी (वसूली) के आदेश जारी किए गए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पिछले तीन महीनों की विस्तृत जांच और ऑडिट के बाद शुक्रवार को यह रिपोर्ट जारी की।

जयपुर के नामी अस्पतालों पर गिरी गाज

इस कार्रवाई की जद में राजधानी जयपुर के कई बड़े और प्रतिष्ठित मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल आए हैं। निलंबित और जुर्माने की कार्रवाई का सामना कर रहे जयपुर के 9 प्रमुख अस्पतालों में मणिपाल हॉस्पिटल, सोनी हॉस्पिटल, नारायणा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, महावीर जयपुरिया हॉस्पिटल और इंडस हॉस्पिटल शामिल हैं। इसके अलावा, प्रदेश के अन्य जिलों में भी बड़ी कार्रवाई हुई है, जिसमें पारस जेके हॉस्पिटल (उत्युदयपुर), जील हॉस्पिटल (डूंगरपुर) और मार्बल सिटी हॉस्पिटल (अजमेर) सहित कुल 24 अस्पतालों पर भारी जुर्माना लगाया गया है।

ऑडिट में खुली धांधली की पोल, ओपीडी मरीजों को जबरन किया भर्ती

 मामले का खुलासा करते हुए चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि नियमित ऑडिट के दौरान इन अस्पतालों में बेहद गंभीर और चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं। निजी अस्पतालों द्वारा राजकोष को चूना लगाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे थे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • फर्जी आईपीडी (IPD) भर्ती: सामान्य ओपीडी (बाहरी मरीज) में आए मरीजों को कागजों पर जबरन भर्ती (आईपीडी) दिखाकर सरकार से भारी-भरकम राशि ऐंठी गई।
  • फर्जी दस्तावेज व क्लेम: नकली या एक ही दस्तावेज को बार-बार (डुप्लीकेट) इस्तेमाल कर फर्जी बिल पास कराए गए।
  • अनावश्यक जांचें: मरीजों की बीमारी से इतर जरूरत से ज्यादा और महंगी जांचें कराकर बिल का दायरा बढ़ाया गया।
  • पैकेज में हेराफेरी: सरकार द्वारा निर्धारित एक ही इलाज या पैकेज की सेवाओं को अलग-अलग टुकड़ों में विभाजित कर अतिरिक्त भुगतान उठाया गया।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, आगे भी जारी रहेगी सख्ती: चिकित्सा मंत्री

 इस कड़ी कार्रवाई पर बोलते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने साफ किया कि स्वास्थ्य योजनाओं में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार राजकोष के एक-एक रुपये का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं, राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल और RGHS की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने बताया कि सभी मामलों में अस्पतालों को पूरी सुनवाई का मौका देने और साक्ष्यों की गहन जांच के बाद ही यह आदेश जारी किए गए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी किसी भी अस्पताल द्वारा फर्जी बिलिंग या वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर इससे भी सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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