भरतपुर संभाग में बारिश के बाद बदला मौसम; कृषि वैज्ञानिक डॉ. विमल पांडे ने दिए उन्नत खेती व संतुलित पोषण के टिप्स
भरतपुर (विष्णु मित्तल)।
भरतपुर, अलवर, करौली और सवाई माधोपुर जिलों में हाल ही में हुई बारिश के बाद तापमान में दर्ज की गई गिरावट ने सरसों की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना दी हैं। मंडियों में सरसों के अच्छे भाव मिलने से किसानों का रुझान भी सरसों की बुवाई की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
प्रमुख कृषि कंपनी के कृषि विज्ञान अधिकारी डॉ. विमल पांडे के अनुसार, अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा सरसों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है। खेतों में मौजूद पर्याप्त नमी का लाभ उठाकर किसान सही समय पर बुवाई कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
हाइब्रिड बीजों के प्रति बढ़ा रुझान
क्षेत्र के किसानों में पायोनियर ब्रांड के 45S46, 45S52 और आर-759 जैसी उन्नत व हाइब्रिड किस्मों के प्रति काफी उत्साह देखा जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसान अपने क्षेत्र की जलवायु और खेत की स्थिति के अनुसार ही सही बीज की मात्रा व बुवाई की दूरी का चयन करें।
तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर का प्रयोग जरूरी
डॉ. विमल पांडे ने बताया कि फसल में तेल के निर्माण और बेहतर उपज के लिए सल्फर अत्यंत महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर डीएपी (DAP) या एसएसपी (SSP) के साथ सल्फर का संतुलित प्रयोग करना चाहिए। साथ ही, अनावश्यक उर्वरकों के प्रयोग से बचते हुए खरपतवार नियंत्रण और फसल की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

