जिला मुख्यालय बना तो उम्मीद की गई थी कि कलेक्टर यहां बैठेंगे तो अफसर जिम्मेदारी से काम करेंगे
सफाई पर सालाना 5 करोड़ खर्च, फिर भी नाले अवरुद्ध, 3 ठेकेदारों ने पूरे कर्मी ही नहीं लगाए
खैरथल (हीरालाल भूरानी) जिला मुख्यालय और नगर परिषद बनने के बाद खैरथल के लोगों को लगा था कि अब सफाई अन्य बड़े शहरों की तरह होगी। कलेक्टर यहीं बैठने से अफसर जिम्मेदार बनेंगे। मगर शहर के हालात जरा भी नहीं बदले। सफाई पर सालाना 5 करोड़ खर्च के बावजूद सड़कों पर कचरे के ढेर हैं। नाले पहले जैसे ही अवरुद्ध हैं।
वार्डों कचरा नहीं उठता। पूरी तरह कचरे से भरी नालियों का कीचड़ बारिश होते ही गलियों में उफन आता है। बारिश थमने पर कचरा सड़ता है और दुर्गंध से हाल बेहाल हो जाता है। जिला मुख्यालय पर बुनियादी सुविधा ही नहीं मिल रही। कलेक्टर से लेकर प्रशासन के तमाम अफसर बैठकों में पीठ एक-दूसरे की थपथपा कर निकल जाते हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ते हैं।
- 35 वार्डों में सिर्फ 29 स्थायी कर्मचारी, झाडू तक नहीं लगती
खैरथल नगर परिषद क्षेत्र में 35 वाडों में 63 हजार लोग रहते हैं। यहां कुल 29 स्थायी कर्मचारियों को 4 जोन में लगाया गया है पुराना आबादी क्षेत्र वाले एक जोन मैं 29 कर्मचारियों के वेतन पर ही 2.86 करोड़ खर्च हो रहे हैं। बाकी 3 जोनों में ठेकेदारों को प्रति जोन एक करोड़ रुपए का ठेका दिया गया है। यहां कुल 130 कर्मी होने चाहिएं। जबकि ठेकेदारों ने दस फीसदी ही नहीं लगा रखे।
- वरुण डाटा, उपसभापति, नप खैरथल का कहना है कि - सभी वार्डों में सफाई कराई जा रही है। यदि किसी वार्ड से शिकायत आती है तो उसका निरीक्षण कर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नालों पर अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी और मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए फॉगिंग कराई जाएगी।
- विक्रम चौधरी, प्रतिपक्ष नेता नप खैरथल का कहना है कि - नगर परिषद सभापति सफाई व्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रहे। कई बार पार्षदों की ओर से बैठक बुलाने की मांग की गई, लेकिन बैठक नहीं बुलाई जाती। इससे कर्मचारी बेलगाम हो गए हैं। उनका कहना है कि नगर परिषद अध्यक्ष का ध्यान केवल अकाउंट सफाई तक सीमित है।
- हवासिंह, सफाई निरीक्षक, नप खैरथल का कहना है कि - नगर परिषद क्षेत्र के सभी नालों की सफाई निरंतर कराई जा रही है। जहां कमी रह गई है वहां जल्द ही सफाई कर दी जाएगी। वाडों में नियमित कर्म कर्मचारी लगाए हुए हैं। रविवार को अवकाश होने के कारण सफाई कार्य नहीं हो पाता।
रविवार को न सफाई न कचरा संग्रहण कर रहे - इतने भारी-भरकम खर्च और संसाधन होने के बावजूद रविवार को सफाई पूरी तरह बंद रहती है। नतीजतन मुख्य बाजार और कॉलोनियों में कचरे के ढेर जमा हो जाते हैं, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़भती है। नगर परिषद के पास सफाई व्यवस्था के लिए पांच ट्रैक्टर, 14 ऑटो टिपर, तीन कचरा लोडर और मृत पशुओं को उठाने के लिए एक क्रेन गाड़ी मौजूद है। इसके अलावा मानसून पूर्व नालों की सफाई के लिए अलग से ठेका भी दिया जाता है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं और बड़े नाले गंदगी से भरे रहते हैं। नालों की सफाई नहीं होने से अब उनमें मच्छरों ने डेरा जमा लिया है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।