जड़खोर गौ धाम का देवस्थान गोपालन पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्री कुमावत और गृह राज्य मंत्री बेढम के श्री कृष्ण बलराम गौ आराधन महोत्सव में शिरकत कर गौशाला का किया निरीक्षण
गोसेवा से आत्मनिर्भरता तक: श्री जड़खोर गोशाला बनेगी मिसाल — जोराराम कुमावत , गीता और गौ माता सनातन संस्कृति की आत्मा है =जवाहर सिंह बेढम
डीग (नीरज जैन) 22 सितंबर। देवस्थान, गौपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्री जोराराम कुमावत ने सोमवार को डीग के श्री जड़खोर गोधाम में श्रीकृष्ण-बलराम गो-आराधन महोत्सव में सभी लोगों को आह्वान किया कि वे गीता के ज्ञान को केवल शास्त्र तक सीमित न रखें, बल्कि इसे व्यवहार और आचरण में भी उतारें। यही गीता का वास्तविक आत्मसात होगा।
देवस्थान, गौपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्री जोराराम कुमावत ने श्री जड़खोर गोधाम का अबलोकन करते हुए गोशाला को हर स्तर पर सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गोशालाएँ केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत की धुरी भी बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि गौमाता की सेवा करना सौभाग्य की बात है। गोधाम में गायों के संरक्षण के साथ-साथ उनके उत्पादों से अनेक प्रकार की वस्तुएँ दीवार के रंग, कागज, मूर्ति, अगरबत्ती, धूप, दीपक और यहाँ तक कि लकड़ी के विकल्प। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय का भी साधन बन रही है। मंत्री कुमावत ने कहा कि सरकार गोशालाओं को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने श्री जड़खोर गोशाला की सराहना करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश में आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगी।
इस अवसर पर्व गृह, गौपालन, पशुपालन, राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि गीता और गाय सनातन संस्कृति की आत्मा है।सनातन धर्म केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से करोड़ों वर्षों से प्रमाणित जीवनपद्धति है। उन्होंने कहा कि सनातन वैज्ञानिक पुष्ट धर्म को हर किसी को आत्मसात करना चाहिए, क्योंकि यही संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् का सजीव संदेश देती है। गृह राज्य मंत्री बेढम ने कहा कि वेद, पुराण और संत-महात्माओं की शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए हमें वासुदेव कुटुंबकम् के कार्यक्रम चलाने चाहिए। भारतीय संस्कृति की जड़ें संस्कारों से बनी हैं। भरत और राम की आदर्श गाथाएँ, पन्ना धाय का बलिदान और ऐसी अनगिनत कहानियाँ इस संस्कृति की अमर नींव हैं। उन्होंने गौमाता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गाय का दूध स्मृति को तीव्र करता है और शरीर को निरोगी बनाता है। गाँव में गोबर और गोमय के अनगिनत फायदे हैं, जो न केवल स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अमूल्य हैं। बेढम ने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें जनता और गौसेवा दोनों का अवसर मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गौमाता के प्रति प्रेम और समर्पण को भी रेखांकित किया। गृह राज्य मंत्री बेढम ने अंत में “जय गोमाता, जय गोपाल” के गगनभेदी नारों के साथ अपने उद्बोधन का समापन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु संत ,गौ सेवक और ग्रामीण मौजूद थे।


