खेतड़ी विधायक धर्मपाल गुर्जर ने की नौरंगपुरा के बूढ वाले बालाजी मेले में शिरकत
विशाल मेले में कुश्ती दंगल, रस्सा-कस्सी प्रतियोगिता और भंडारे का आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई धोक
उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव ) उपखंड क्षेत्र की सीमा पर स्थित बूढ बालाजी धाम आश्रम परिसर पर मेले व कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया l अरावली की सुरम्य और मनोहारी पहाड़ियों के बीच बसे नौरंगपुरा गांव में स्थित बूढ वाले बालाजी मंदिर में शुक्रवार को धार्मिक उल्लास, भक्ति और ग्रामीण संस्कृति के उत्साह के साथ एक विशाल मेले का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक मेले में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने बालाजी के दर्शन किए और विभिन्न सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों का आनंद लिया। इस अवसर पर खेतड़ी के वर्तमान विधायक इंजीनियर धर्मपाल गुर्जर ने विशेष रूप से पहुंचकर मेले की शोभा बढ़ाई, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मुलाकात की और क्षेत्र के लोगों को संबोधित किया।
विधायक ने किया मंदिर विकास का वादा
विधायक धर्मपाल गुर्जर ने मंदिर परिसर में आयोजित 'वार्षिक मेले' के कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने इस दौरान अपने संबोधन में मंदिर के विकास कार्यों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। विधायक ने उपस्थित जनसमूह को आश्वासन दिया कि मंदिर के जीर्णोद्धार और अन्य विकास कार्यों के लिए वह हर संभव सहयोग करेंगे, चाहे इसके लिए सरकारी बजट का उपयोग करना पड़े या उनके विधायक कोटे का।
उन्होंने आगे कहा, "ये धार्मिक मेले और आयोजन हमारी सनातन संस्कृति के सच्चे प्रतीक हैं और इन्हें न केवल जीवित रखना चाहिए, बल्कि हमेशा बढ़ावा भी देना चाहिए। ये मेले ही वह मंच होते हैं जहाँ हमारा आपसी भाईचारा, मेल-जोल और सामाजिक सौहार्द मजबूत होता है।"
मीडियाकर्मियों द्वारा मंदिर परिसर के विकास के लिए विधायक कोटे से खर्च करने के संबंध में पूछे गए सवाल पर विधायक गुर्जर ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के लिए उनकी सोच पूरी तरह से सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि "जहां भी सरकारी पैसा लगना उचित होगा, चाहे वह विधायक कोटे से हो या अन्य सरकारी योजना से, विकास के लिए उनका 'दिल और दिमाग' पूरी तरह से खुला है।" विधायक ने बुढ वाले बालाजी धाम से पूरे क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि, अमन-चैन और भाईचारा बने रहने की मंगल कामना की।
मेले में दिखा रोमांच और उत्साह: मेले का मुख्य आकर्षण 21,000 रुपये की इनामी राशि के लिए आयोजित कुश्ती दंगल रहा। इसमें चार पहलवानों के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। हालांकि, पहले ही राउंड में चारों पहलवानों के बीच कांटे की टक्कर रही और वे बराबरी पर रहे। नतीजतन, 21,000 रुपये की इनामी कुश्ती बराबरी पर समाप्त हुई। पहलवानों का उत्साह बनाए रखने के लिए चारों को 2500-2500 रुपये का सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
कुश्ती के अलावा, पुरुषों और महिला प्रतिभागियों के बीच आयोजित रस्सा-कस्सी प्रतियोगिता ने भी दर्शकों को खूब रोमांचित किया और ग्रामीण खेलों के प्रति उनका उत्साह बढ़ाया।
भक्ति और आस्था का सैलाब: मेले में क्षेत्र की आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जोधपुरा, बाघोली, चक जोधपुरा, हरिपुरा, सुनारी, सुरपुरा, सराय, नौरंगपुरा, कांकरिया, गुड़ा ढहर, खोह सहित कई गांवों के हजारों श्रद्धालु अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली, जीप और अन्य निजी वाहनों से बालाजी मंदिर पहुंचे। सभी ने बालाजी की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना की, धोक लगाई और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए मन्नतें मांगी।
क्षेत्रीय सरपंच कमला भावरिया के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं का समूह मंगल गीत गाता हुआ मंदिर पहुंचा। इन महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में बालाजी के दरबार में धोक लगाकर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
मेले में बच्चों, युवाओं और महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। विभिन्न प्रकार की दुकानों पर भीड़ दिखी, वहीं झूलों पर झूमकर लोगों ने मेले का पूरा आनंद लिया। चाट-पकौड़ी, मिठाइयों और अन्य व्यंजनों की दुकानों पर भी श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही।
धार्मिक कार्यक्रमों और भंडारे का आयोजन
मंदिर ट्रस्ट द्वारा धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का भी आयोजन किया गया। सुबह के समय सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ, जिसने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद पाटोत्सव कार्यक्रम में कई विद्वान पंडितों और संतों ने हिस्सा लिया और धर्म-चर्चा की, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हुआ।
मंदिर के भामाशाह और ट्रस्ट अध्यक्ष गोकुलचंद प्रजापति द्वारा मेले के दौरान विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई। मेले में आए हजारों श्रद्धालुओं ने इस भंडारे में प्रसादी ग्रहण की, जिसने सामाजिक समरसता और एकजुटता का संदेश दिया।
ये गणमान्य रहे उपस्थित:
मेले के सफल आयोजन में मंदिर ट्रस्ट और क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों का सहयोग रहा। इस अवसर पर ट्रस्ट के संचालक डॉ रामकुमार सिराधना, समाजसेवी मदनलाल भावरिया, डॉ रामावतार गजराज, कैप्टन महेश कुमार, नवरंगपुरा सरपंच प्रतिनिधि ताराचंद भावरिया, प्रहलाद सिंह धूण, मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गोकुलचंद प्रजापति, सभाचंद जाखड़, मातादीन, सरपंच रोहिताश सैनी (जोधपुरा), महेंद्र सिंह, चौथमल, रोहिताश, कानाराम, और मंदिर के देखरेख कर्ता सहीराम भगत सहित क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित लोग और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।


