जालिया गाव में किसानों का 158 दिनों से जिंदल सॉ के अवैध ब्लास्टिंग , चरागाह के खिलाफ आंदोलन तेज
भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल)बनेड़ा तहसील के जालिया गांव के किसानों ने अपने विधायक को चेतावनी भरा पत्र मुख्मंत्री के नाम ज्ञापन दिया , लापिया पॉइंट पर जिंदल सॉ लिमिटेड द्वारा अवैध ब्लास्टिंग ओर खनन को तुरंत बंद नहीं हुआ, तो गाव के किसान विधानसभा के बाहर सामूहिक आत्मदाह करेंगे। विरोध कर रहे किसानों की आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई आज 158 दिनों से चल रहे धरने में कभी भी प्रसाशन ने आकर किसानो कि समस्या नहीं सुनी , जिसमें धरणा दे रहे किसानो को कम्पनी व ठेकेदार की और से जानलेवा खतरा बना हुआ हैं।
संकट की शुरुआत 14 जून 2024 को हुई, जब अनधिकृत विस्फोट से 25 मीटर दूर खेतों से और 200 मीटर दुरी आबादी से घर पर पत्थरों की बौछार हुई। दरवाजे-छतें टूट गईं एक मकान ढहा गया था , परिवार—जिसमें डेढ़ माह की बच्ची शामिल थी—बाल-बाल बच गई। इस घटना से ग्रामीणों में भय का माहौल फैल गया। किसानों ने 205 दिनों तक धरना दिया, जिसके बाद एडीएम ओ.पी. मेहरा, एएसपी पारस जैन, एसडीएम बनेड़ा, डीवाईएसपी मांडल और पुलिस अधिकारियों की मध्यस्थता से जिंदल ने लिखित सहमति दी। प्रशासन ने सात दिनों में शर्तें लागू करने का वादा किया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
भीलवाड़ा जिला न्यायालय के आदेशों और डीजीएमएस नियमों का उल्लंघन करते हुए कंपनी अब 12 मीटर गहरे और 125.MM चौड़े डीप होल कर रही है और 50 से 70 kg बारूद प्रतिहोल डाल कर अवैध ब्लास्टिंग कर रही है। जिससे गांव के 75% से अधिक घर दरारों से तरबतर हो गए हैं, जो कभी भी ढह सकते हैं। उड़ते डस्ट मिट्टी वे पत्थरों से खेत बंजर हो रहे हैं। पत्र में कहा गया, “हमारी जिंदगी और आजीविका खतरे में लटकी हुई है।” कंपनी ठेकेदारों द्वारा किसानों को हिंसा, गुंडागर्दी और झूठे मुकदमों की धमकियां मिल रही हैं,
158 दिनों से किसान लापिया पॉइंट पर धरना दे रहे हैं। हमारी चरागाह भूमि हमारे गाव में ही दी जाय और अवैध ब्लास्टिंग व खनन को तुरंत रोका जाये, सुरक्षा गारंटी और धमकीबाजों पर कार्रवाई की जावे 8 दिसंबर को फिर अवैध विस्फोट से हमारे खेतो बड़े बड़े पत्थर आकर घीरे जो खेतो में काम कर रही महिलाएं ओर उनके बच्चे डरे हुए हैं और खेती कार्य मुश्किल हो गया।
जालिया के प्रताड़ित किसानों ने बताया की अगर जिन्दल कम्पनी को प्रसासन वे माइनिंग विभाग कि सह पर DGMS और कोर्ट के आदेशो कि ध्जिया उड़ा रहे और प्रसासन माइनिंग विभाग मोन हें न्यायालय के आदेश, एसडीएम रोक पत्र, डीजीएमएस अनुमति और खनन विभाग के रोक के बाद भी जिला प्रसासन नजरअंदाज किया गया,अब हम किसानो के पास आत्मदाह के आलावा कोई और रास्ता नहीं बचा हे और हम किसानो की मोंत के जिमेदार जिला प्रसासन वे राजस्थान सरकार होगी और ग्रामीणों ने यह भी बताया की हमारी इस खबर को ही किसानो का सुसाईट नोट माने किसान अवैध ब्लास्टिंग और चरागाह से परेसान हो कर यह अगला कदम उठाने होंगे