रीवा की घटना निंदनीय; असामाजिक तत्वों को सख्त दंड दे सरकार, अल्पसंख्यक जैन संतों को मिले सुरक्षा: आचार्य विशद सागर महाराज

May 27, 2026 - 16:51
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रीवा की घटना निंदनीय; असामाजिक तत्वों को सख्त दंड दे सरकार, अल्पसंख्यक जैन संतों को मिले सुरक्षा: आचार्य विशद सागर महाराज

पदमपुरा (जयपुर/कमलेश जैन) मध्य प्रदेश के रीवा में जैन संतों के साथ हुई अप्रिय घटना को लेकर जैन समाज में गहरी चिंता और आक्रोश है। पदमपुरा (जयपुर) में ससंघ विराजमान परम पूज्य दिगंबर आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज ने इस घटनाक्रम पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। आचार्य श्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार और प्रशासन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दोषी व असामाजिक तत्वों को कड़ी से कड़ी सजा दे, ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो।

प्रतिनिधिमंडल ने की आचार्य श्री से भेंट, देशव्यापी चिंता से कराया अवगत

बुधवार प्रातः 7:00 बजे मन्दिर प्रबन्ध समिति के संयुक्त मंत्री व मुनि व्यवस्था समिति (गायत्री नगर, जयपुर) के संयोजक संजय ठोलिया के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आचार्य श्री के दर्शन कर उनके पाद प्रक्षालन किए।

इस दौरान अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने मध्य प्रदेश के रीवा में हुई घटना का प्रासंगिक विवरण प्रस्तुत करते हुए समाज की सुरक्षा को लेकर आचार्य श्री से विस्तृत चर्चा की।

"संतों के आशीष से ही जग में शांति का वातावरण" — आचार्य श्री

चर्चा के दौरान आचार्य विशद सागर जी महाराज ने जैन धर्म के सिद्धांतों और संतों की चर्या को रेखांकित करते हुए कहा:

"जैन सिद्धांत विश्व का सबसे प्राचीन और शांतिप्रिय धर्म है। प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर स्वामी तक, सभी तीर्थंकरों ने निर्ग्रंथ रहकर, श्रमण बनकर और व्रतों को धारण कर मोक्ष प्राप्त किया। इसी पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए वर्तमान के साधु, आचार्य और आर्यिकाएं कठिन साधना कर रहे हैं। संतों के इसी त्याग, संयम और आशीष से आज संसार में शांति का वातावरण बना हुआ है।"

आचार्य श्री द्वारा सरकार, प्रशासन और श्रावकों को मुख्य निर्देश:

  • सरकारों व प्रशासन का दायित्व: अल्पसंख्यक जैन समुदाय और उनके संतों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए। संतों की सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से सरकारों और प्रशासन के हाथों में है।

  • श्रावकों का कर्तव्य: आचार्य श्री ने श्रावकों को सचेत करते हुए कहा कि जब भी साधु-संतों का विहार हो, स्थानीय प्रशासन को अनिवार्य रूप से सूचित करें। श्रावक स्वयं भी संतों के आहार-विहार और उनके जीवन की रक्षा व संरक्षण का पूरा ध्यान रखें।

विश्व शांति के लिए हुई शांतिधारा, श्रावकों को मिला आशीर्वाद

इससे पूर्व, आचार्य श्री की प्रातःकालीन चर्या के अंतर्गत मंत्रोच्चार के साथ जाप, विशेष पूजा और अभिषेक संपन्न हुआ। विश्व कल्याण की भावना के साथ भव्य शांतिधारा कराई गई।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित संजय ठोलिया, राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन, अनिल पोलक्या सहित पदमपुरा मंदिर जी में उपस्थित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं तथा प्रथम अभिषेक व शांतिधारा का पुण्य अर्जित करने वाले श्रेष्ठियों को आचार्य श्री ने अपना अमूल्य मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

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