पोषाहार में करोड़ों का महाघोटाला: ACB की बड़ी कार्रवाई, 9 पर्यवेक्षकों सहित 18 आरोपी गिरफ्तार
नागौर (राजस्थान) नागौर जिले के डेगाना, परबतसर, मकराना और कुचामन सिटी में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और महिलाओं के हक के पोषाहार में करोड़ों रुपए के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस संगठित भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 महिला पर्यवेक्षकों (Supervisors) समेत कुल 18 अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को सभी आरोपियों को जोधपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत (क्रमांक 1) में पेश किया गया, जहाँ से कोर्ट ने उन्हें 15 दिन की न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया है।
- 100 से अधिक फर्जी ग्रुप्स और फोन टैपिंग से खुला राज
एसीबी के विशेष लोक अभियोजक प्रवीण वर्मा के अनुसार, जयपुर मुख्यालय को इस परियोजना में भारी भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही थीं। एसीबी ने संदिग्ध अधिकारियों और दलालों के फोन सर्विलांस (टैपिंग) पर लिए, जिससे इस महाघोटाले की पुष्टि हुई। विभागीय अधिकारियों ने अनाधिकृत ठेकेदारों—हरि सिंह चारण, योगेश दायमा और किशोर बैंदा—के साथ साठगांठ कर केवल कागजों में 100 से अधिक फर्जी स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups) बना डाले और उनके बैंक खाते खुलवा दिए। नियम विरुद्ध तरीके से महीने में महज एक या दो बार नाममात्र का पोषाहार सप्लाई कर पूरे महीने के फर्जी बिल पास करवाए जा रहे थे।
- 25% कमीशन का खेल और फर्जी हस्ताक्षर
जांच में सामने आया कि यह पूरा घोटाला 25 प्रतिशत के फिक्स कमीशन पर चल रहा था। सरकारी पैसा खातों में आने के बाद महिला पर्यवेक्षक स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाकर नकद पैसा निकलवाती थीं और ठेकेदारों तक पहुंचाती थीं। इस एवज में नागौर उप निदेशक कार्यालय के कनिष्ठ सहायक दिलीप कुमार को प्रत्येक परियोजना से 10 हजार रुपए की 'मंथली बंधी' जा रही थी। वहीं, एक निजी व्यक्ति महेंद्र सिंह ने कबूल किया कि वह समूहों के पदाधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर रिकॉर्ड तैयार करता था, जिसकी पुष्टि FSL रिपोर्ट में भी हुई है।
- यह आरोपी पहुंचे जेल; दो तत्कालीन CDPO पहले से जमानत पर
एसीबी ने कार्रवाई करते हुए जिन 9 महिला पर्यवेक्षकों को गिरफ्तार किया है, उनमें हेमा अग्रवाल, गीता वर्मा, मनीषा शेखावत, अंजु शर्मा, ज्याना देवी, संतोष देवी, संतोष चौधरी, राजबाला शर्मा और मूली देवी शर्मा शामिल हैं। इनके अलावा कार्यालयों में तैनात लिपिक, सहायक प्रशासनिक अधिकारी और कंप्यूटर ऑपरेटरों—आनन्द प्रकाश दायमा, राजेन्द्र त्रिपाठी, खूबचंद, विजेन्द्र सिंह, दिलीप कुमार, कमल किशोर शर्मा, मंजूर अली, राजेन्द्र प्रसाद दायमा और निजी व्यक्ति महेंद्र सिंह को जेल भेजा गया है।
गौरतलब है कि करोड़ों रुपए का भुगतान करने वाले कुचामन के तत्कालीन सीडीपीओ शक्ति सिंह (7.33 करोड़ का भुगतान) और मकराना की तत्कालीन सीडीपीओ सुधा यादव (1.47 करोड़ का भुगतान) को एसीबी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वे वर्तमान में जमानत पर हैं। मामले का एक अन्य आरोपी नरेश दायमा अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संगीन धाराओं में मामला प्रमाणित पाया गया है।


