पूर्वी राजस्थान की मातृभाषा पर सियासत तेज: पूर्व विधायक सुखराम कोली ने सरकार से की ब्रजभाषा को मान्यता देने की मांग
धौलपुर/बसेडी (नाहर सिंह मीना)
पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुखराम कोली ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूर्वी राजस्थान की भाषाई एवं सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति में ब्रजभाषा और स्थानीय बोलियों को उचित स्थान देने की मांग उठाई है।
22 मई 2026 को भेजे गए इस पत्र में उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मातृभाषा आधारित शिक्षा को लेकर दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्वी राजस्थान के धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा जिलों की वास्तविक भाषाई स्थिति राज्य के अन्य हिस्सों से अलग है। यहां आम जनजीवन, पारिवारिक संवाद और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति मुख्य रूप से ब्रजभाषा पर आधारित है।
पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में उपलब्ध कराने पर जोर देती है, ताकि बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति और शैक्षणिक विकास बेहतर हो सके। ऐसे में स्थानीय भाषाई परिस्थितियों का अध्ययन किए बिना कोई भी भाषा नीति लागू करना विद्यार्थियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
पूर्व विधायक ने राज्य सरकार से मांग की है कि पूर्वी राजस्थान के जिलों में भाषाई स्थिति का स्वतंत्र अध्ययन कराया जाए तथा विद्यालयी शिक्षा में स्थानीय स्तर पर प्रचलित ब्रजभाषा एवं हिंदी को शिक्षा-सहायक भाषा के रूप में मान्यता देने पर विचार किया जाए। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में स्थानीय बोलियों से जुड़े प्रश्न न पूछे जाने की भी मांग रखी गई है।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि उद्देश्य किसी भाषा का विरोध करना नहीं, बल्कि क्षेत्र की भाषाई और सांस्कृतिक विशेषताओं के अनुरूप संतुलित एवं व्यावहारिक शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
इस पत्र के सामने आने के बाद पूर्वी राजस्थान में मातृभाषा और शिक्षा नीति को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना तेज हो गई है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।


